Amit Shah in Parliament Monsoon Session: ऑपरेशन सिंदूर पर राज्यसभा में दो दिनों से चल रही चर्चा पर सरकार की तरफ से जवाब देने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खड़े हुए तो विपक्षी सांसदों ने हंगामा काट दिया। शाह ने अपनी बात जारी रखते हुए कई सवालों के जवाब दिए।
राज्यसभा में अमित शाह ने ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम आतंकी हमले को लेकर बड़ा बयान देते हुए केंद्र सरकार की सुरक्षा नीति और कश्मीर की हालिया स्थिति का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्यवाही हो रही है और कश्मीर पत्थरबाजी और उग्रवाद से मुक्त हो रहा है। शाह ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदमों की बजाय पहले की सरकारें वोटबैंक की राजनीति में लगी हुई थीं। जानिए उन्होंने क्या सबसे अहम दस बातें कहीं।
गृह मंत्री ने बताया कि पहलगाम हमले में आतंकियों ने जिन तीन राइफल्स का इस्तेमाल किया था, उन्हें बरामद कर लिया गया है। साइंटिफिक जांच से पुष्टि हुई कि हमला इन्हीं हथियारों से हुआ। इसके अलावा 44 कारतूस भी बरामद हुए, जिनका मिलान घटनास्थल से किया गया। कैमरे से आतंकियों की चेहरे की पहचान भी हो चुकी है।
अमित शाह ने कहा कि अब कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाएं पूरी तरह बंद हो गई हैं। घाटी में स्थानीय युवा अब आतंकी संगठनों में शामिल नहीं हो रहे, जो एक सकारात्मक संकेत है। अब जो भी आतंकी मारे जा रहे हैं, वे सभी पाकिस्तानी मूल के हैं।
अमित शाह ने ऑपरेशन सिंदूर और महादेव को भारत की सैन्य ताकत और प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि इन ऑपरेशनों ने भारत का मान बढ़ाया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृढ़ इच्छाशक्ति की प्रशंसा की जिन्होंने 140 करोड़ जनता की भावना के अनुसार कार्रवाई की।
अमित शाह ने विपक्ष के वॉकआउट पर तंज कसते हुए कहा कि ये लोग इसलिए भाग रहे हैं, क्योंकि इन्होंने वोटबैंक की राजनीति के चलते आतंकवाद से कभी सख्ती से नहीं निपटा। उन्होंने कहा कि जब नेता प्रतिपक्ष को बोलने नहीं दिया जा रहा तो पीएम के संबोधन की मांग करना हास्यास्पद है।
गृह मंत्री ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा, “कल आप पूछ रहे थे कि आतंकियों को आज क्यों मारा गया? कल क्यों नहीं मारा गया? क्या इसलिए कि राहुल गांधी को भाषण देना था?” उन्होंने कहा कि कांग्रेस की प्राथमिकता राष्ट्रीय सुरक्षा नहीं, बल्कि तुष्टिकरण और वोटबैंक की राजनीति है।
शाह ने कांग्रेस नेता पी चिदंबरम पर निशाना साधते हुए कहा कि जब वे गृह मंत्री थे, तब अफजल गुरु को फांसी नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की मानसिकता देश देख चुका है इनकी प्राथमिकता सुरक्षा नहीं, राजनीति है।
गृह मंत्री ने कहा कि अब कश्मीर में विकास कार्य हो रहे हैं, संविधान का झंडा फहरा रहा है। उन्होंने दावा किया कि अब पंचायत चुनावों में 93% तक मतदान हो रहा है, जो लोकतंत्र की वापसी का संकेत है। अब आतंकी मारे जाते हैं तो विरोध नहीं होता, बल्कि आम नागरिक भारत के साथ खड़े हैं।
शाह ने बताया कि एनआईए और ईडी की कार्रवाई से हुर्रियत और टेरर फाइनेंसिंग नेटवर्क का इकोसिस्टम खत्म हुआ है। उन्होंने कहा कि जहां कभी बच्चे पत्थरबाजी करते थे, वहां अब शांति और शिक्षा का माहौल है। तीन साल में एक भी हड़ताल या संगठित हत्या नहीं हुई है।
अमित शाह ने बताया कि बीजेपी सरकार के कार्यकाल में नॉर्थईस्ट में उग्रवाद और नक्सलवाद 75 फीसदी तक कम हो गया है। उन्होंने कांग्रेस की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया, जिनके चलते आतंकवाद को देश में पनपने का मौका मिला। 'आतंकवाद कभी भी भारत की आत्मा को तोड़ नहीं पाएगा। मैं आज मोदी जी को उनकी दूरदर्शिता के लिए बहुत बहुत साधुवाद देता हूं।', उन्होंने कहा।
अमित शाह ने कांग्रेस शासन पर सवाल उठाते हुए पूछा कि दाऊद इब्राहिम, सैय्यद सलाहुद्दीन, टाइगर मेमन, अनीश इब्राहिम, रियाज भटकल और इकबाल किसके राज में भागे थे? कांग्रेस आतंकवाद के मुद्दे पर सवाल उठाने के भी लायक नहीं है। चिदंबरम को जवाब देते हुए शाह ने कहा, 'अगर 1965 की लड़ाई निर्णायक थी तो आतंकवाद क्यों फैला? और अगर 1971 की लड़ाई निर्णायक थी तो आतंकवाद क्यों फैला?'