अभिषेक बनर्जी (सोर्स- IANS) 
देश

दुनिया में आग लगाओ, फिर...अभिषेक बनर्जी का सरकार को दो टूक संदेश; कहा- बिल लाना जवाबदेही का विकल्प नहीं

Public Examinations Bill 2026: लोकसभा में अभिषेक बनर्जी ने पब्लिक एग्जामिनेशन बिल का समर्थन किया, लेकिन सरकार को नसीहत देते हुए पेपर लीक पर जवाबदेही मांगी है।

अमन मौर्या

Abhishek Banerjee Targets BJP Over Paper Leaks: मानसून सत्र में लोकसभा में सरकार द्वारा पेश पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026 पर मंगलवार को चर्चा चल रही है। विपक्ष लगातार सरकार से तीखे सवाल पूछ रही है। बिल पर चर्चा के दौरान तृणमूल कांग्रेस के सांसद और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने बिल का समर्थन करते हुए सरकार को नसीहत भी दे डाली।

अभिषेक ने कहा कि हम इस बिल का समर्थन करते हैं, लेकिन मैं शुरू से ही यह साफ कर देना चाहता हूं कि सिर्फ इसलिए कि हम इस बिल और संशोधन का समर्थन करते हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार हमसे उन लोगों की तारीफ करने की उम्मीद करे जिन्होंने दुनिया में आग लगाई हो और फिर वे बस पानी की एक बाल्टी लेकर आ जाएं।

अभिषेक ने सरकार को दी नसीहत

पब्लिक एग्जामिनेशन संशोधन बिल, 2026 पर चर्चा के दौरान TMC सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि हर छात्र को यह भरोसा मिलना चाहिए कि परीक्षाएं निष्पक्ष होंगी। हर माता-पिता को यह विश्वास होना चाहिए कि सफलता कड़ी मेहनत, प्रतिभा और ईमानदारी से मिलती है, न कि पैसे, रसूख या संगठित आपराधिक गिरोहों से। सरकार को नसीहत देते हुए उन्होंने कहा कि इस बिल का समर्थन जवाबदेही का विकल्प नहीं हो सकता।

NDA और BJP सरकार नाकाम रही: TMC

अभिषेक ने कहा कि एक मजबूत कानून जरूरी है, लेकिन सिर्फ वही काफी नहीं है। अगर सिस्टम की कमियों की वजह से परीक्षाओं की शुचिता पर सवाल उठते रहेंगे तो कोई भी संशोधन, चाहे कितना भी सख्त क्यों न हो, उन लाखों छात्रों का भरोसा वापस नहीं दिला पाएगा जिन्होंने इसे खो दिया है। जिस बिल पर चर्चा हो रही है, वह कोई समाधान नहीं है। बल्कि, यह बिल एक तरह से यह स्वीकार करना है कि NDA और BJP सरकार नाकाम रही है।

सरकार की नाकामी पूरे देश के सामने आई: अभिषेक बनर्जी

चर्चा के दौरान अभिषेक ने कहा कि आज, जब सरकार की यह नाकामी पूरे देश में जाहिर हो चुकी है तो सरकार चाहती है कि संसद यह माने कि सजा बढ़ाने से 12 साल की नाकामी मिट जाएगी। इस सरकार ने एक हुनर ​​में महारत हासिल कर ली है कि जब भी गवर्नेंस नाकाम होती है, वे कानून बदल देते हैं; जब भी प्रशासन लड़खड़ाता है, वे सजा बढ़ा देते हैं; जब भी संस्थान नाकाम होते हैं, वे एक और कमिटी बनाने का ऐलान कर देते हैं, लेकिन गवर्नेंस हेडलाइन से नहीं चलती। गवर्नेंस को नतीजों से मापा जाता है।

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