रेलवे के दावों का असली सच! (AI जेनरेटेड इमेज)
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न पीने की पानी... न बैठने की जगह, 89% स्टेशनों का बुरा हाल; CAG रिपोर्ट ने खोली रेलवे के दावों की पोल

Indian Railways: रिपोर्ट के अनुसार, कई स्टेशनों पर पीने के पानी के सैंपल में ई. कोली बैक्टीरिया पाए गए। जबकि, 89% से अधिक स्टेशनों पर बैठने की जगह, शैचालय जैसी बेसिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं।

मनोज आर्या

CAG Report On Indian Railways: भारतीय रेलवे देश की परिवहन और आर्थिक व्यवस्था की रीढ़ है। यह दुनिया का चौथा सबसे बड़ा नेटवर्क है, जो हर दिन करोड़ों यात्रियों और भारी मात्रा में माल को एक जगह से दूसरे जगह पर पहुंचाकर भारत को गति और एकता प्रदान करता है।

हालांकि, सफर के दौरान ट्रेन और रेलवे स्ट्रेशनों पर यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं पर हमेशा ही सवाल उठते रहे हैं। देश के कई स्टेशनों पर आज भी पीने की साफ पानी और बैठने की जगह जैसे बेसिक सुविधाओं की कमी ने एक बार फिर नया बहस छेड़ दिया है।

कैग की जांच रिपोर्ट में क्या मिला?

दरअसल, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की मिलने वाली बनियादी सुविधाओं को लेकर एक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, कई स्टेशनों पर पीने के पानी के सैंपल में ई. कोली बैक्टीरिया पाए गए। जबकि, 89 प्रतिशत से अधिक स्टेशनों पर बैठने की जगह, शैचालय, पंखे, इंडीकेटर्स जैसी एक या उससे अधिक बेसिक सुविधाएं स्टैंडर्ड के मुताबिक उपलब्ध नहीं थीं।

कैग रिपोर्ट में क्या मिला?

संसद में 12 अगस्त को प्रस्तुत की गई कैग रिपोर्ट में यह भी जानकारी सामने आई है कि साफ-सफाई, पानी की उपलब्धता और मेडिकल हेल्प से संबंधित पैसेंजर्स की शिकायतों की संख्या में इजाफा हुआ है। यात्री सुविधाओं से जुड़े 59% काम समय-सीमा के अंदर पूरे नहीं हुए, जबकि इन सुविधाओं के लिए आवंटित बजट का भी प्रयाप्त इस्तेमाल नहीं किया गया।

इससे पहले 2018 में हुआ था ऑडिट

बता दें कि कैग की यह ऑडिट रिपोर्ट 2019-20 से 2023-24 के बीच की अवधी के लिए किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इससे पहले ऐसा ऑडिट 2018 में हुआ था, जिसमें रेलवे स्टेशनों पर यात्री से जुड़े सुविधाओं को प्रमुखता से शामिल किया गया। लगभग एक दशक बाद किए इस ऑडिट में कैग ने पाया कि पिछली रिपोर्ट के बाद रेलवे मंत्रालय की ओर से कमियों को दूर करने के लिए आश्वासनों के बावजूद कई समस्याएं बनी हुई हैं।

कैग की रिपोर्ट सामने आने के बाद केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रविवार, (16 अगस्त) को सुधार के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए। इनमें करीब 20,000 स्थानों पर, जिनमें वाटर कूलर भी शामिल हैं, टैंक से नल तक पानी की फिल्ट्रेशन व्यवस्था शुरू करना शामिल है।

रेल मंत्रालय के अधिकारी ने क्या कहा?

रेल मंत्रालय के एक सीनियर ऑफिसर ने बताया कि अब स्टेशनों पर पानी की क्वालिटी की निगरानी रेलवे बोर्ड के स्तर पर की जाएगी। पानी के स्टोरेज वाले टैंकों की तय समय पर सफाई और रखरखाव होगा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पानी की गुणवत्ता तथा काम की प्रगति से जुड़ी रिपोर्ट समय-समय पर सार्वजनिक की जाएगी।

89% स्टेशन पर बेसिक सुविधा नहीं

रेलवे बोर्ड ने साल 2003 में रेलवे स्टेशनों पर मिनिमम एसेंशियल एमेनिटीज (MEA)) के स्टैंडर्ड तय किए थे। करीब 15 साल यानी की अप्रैल 2018 में इसमें बदलाव किया गया। इन सुविधाओं में पानी पीने का नल, बैठने की जगह, यूरिनल, शौचालय, वेटिंग रूम, वाटर कूलर, पंखे, घड़ी, प्लेटफॉर्म शेड, पब्लिक एड्रेस सिस्टम, पार्किंग और आवागमन क्षेत्र तथा इलेक्ट्रॉनिक ट्रेन इंडिकेटर बोर्ड शामिल हैं। इन सुविधाओं को 31 अगस्त 2018 तक सभी स्टेशनों पर उपलब्ध कराया जाना था।

सिर्फ 11% स्टेशनों पर एमईए उपलब्ध

हालांकि, कैग की रिपोर्ट में सामने आया कि इन स्टैंडर्ड को लागू होने के दो दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी केवल 11 प्रतिशत निरीक्षित स्टेशनों पर सभी मिनिमम एसेंशियल एमेनिटीज उपलब्ध थीं। कैग ने 5,900 से ज्यादा स्टेशनों में से 512 स्टेशनों का निरीक्षण किया। इनमें सिर्फ 54 स्टेशन ऐसे थे, मिनिमम एसेंशियल एमेनिटीज के सभी मानकों को पूरा किया गया था। ये 54 स्टेशन 13 रेलवे जोन में फैले हुए हैं।

यात्री की सुविधाओं पर कैग रिपोर्ट

प्रमुख स्टेशनों पर भी सुविधा का अभाव

देश के कई बड़े रेलवे स्टेशनों पर भी कमियों का असर देखने को मिला। साल में 710 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई और 1.03 करोड़ से 11.47 करोड़ तक यात्रियों की आवाजाही वाले कई स्टेशन भी बुनियादी सुविधाओं के अभावि में संचालित हो रहे हैं। इनमें नई दिल्ली, हावड़ा, हजरत निजामुद्दीन जंक्शन, सिकंदराबाद, एमजीआर चेन्नई सेंट्रल, अहमदाबाद, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, केएसआर बेंगलुरु, सूरत और आनंद विहार टर्मिनल शामिल हैं।

188 स्टेशनों पर पीने की पानी के नल नहीं

कैग की रिपोर्ट में यह पता चला है कि 188 स्टेशनों पर जरूर तक के हिसाब से पानी पीने के लिए नल नहीं थे। वहीं, 21 रेलवे स्टेशनों पर वेटिंग रूम नहीं थे। इसके अलावा 111 स्टेशनों पर तय संख्या में यूरिनल और 59 स्टेशनों पर पर्याप्त संख्या में शौचालय नहीं थे। 62 स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म या प्लेटफॉर्म शेड का ढका हुआ क्षेत्र तय मानक से कम था।

60 रेलवे स्टेशनों पर घड़िया नहीं

रिपोर्ट के मुताबिक, देश की 60 से अधिक रेलवे स्टेशनों पर घड़ियां उपलब्ध नहीं थीं, जबकि 128 स्टेशनों पर तय संख्या से कम वाटर कूलर थे और 149 स्टेशनों पर मानकों के अनुसार, कूड़ेदान भी उपलब्ध नहीं थे। कैग ने शारीरिक तौर पर अक्षम यात्रियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं में भी बड़ी खामियां दर्ज की है।

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