Ajwain In Monsoon: बारिश का मौसम बेहद सुहाना और सुकून देने वाला होता है, लेकिन इस दौरान खान-पान और पाचन से जुड़ी परेशानियां भी बढ़ सकती हैं। नमी, मौसम में बदलाव और अनियमित खान-पान के कारण कुछ लोगों को गैस, पेट फूलना और अपच जैसी परेशानियां हो जाती है। ऐसे में भारतीय रसोई में मौजूद अजवाइन एक पारंपरिक मसाले के तौर पर खास जगह रखती है।
अजवाइन को मानसून की दिनचर्या में शामिल करने से पेट से जुड़ी समस्याओं में आराम मिलता है। अजवाइन का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से पाचन को बेहतर रखने और मौसम से जुड़ी कुछ सामान्य परेशानियों में घरेलू देखभाल के तौर पर किया जाता रहा है।
बारिश के मौसम में वातावरण में नमी बढ़ जाती है और तापमान में उतार-चढ़ाव होता रहता है। इसके साथ अगर भोजन का समय नियमित न हो या खान-पान में लापरवाही हो, तो गैस, पेट फूलना और अपच जैसी समस्याएं परेशान कर सकती हैं। यही वजह है कि इस मौसम में हल्का, ताजा और संतुलित भोजन लेने के साथ पाचन को ध्यान में रखने की सलाह दी जाती है।
आयुर्वेद में अजवाइन को वात और कफ को संतुलित करने वाली जड़ी-बूटी के रूप में देखा जाता है। पारंपरिक रूप से इसका इस्तेमाल गैस और अपच जैसी पाचन संबंधी परेशानियों में किया जाता रहा है। अजवाइन में थाइमोल नामक यौगिक पाया जाता है, इसमें रोगाणुरोधी, एंटीऑक्सीडेंट और एंटीस्पास्मोडिक गुण होते हैं।
भारतीय घरों में भोजन के बाद थोड़ी सी अजवाइन चबाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। इसे कार्मिनेटिव प्रभाव से जोड़ा जाता है, यानी यह पाचन तंत्र में फंसी गैस और पेट की असहजता को कम करने में मदद कर सकती है।
अजवाइन को पानी में उबालकर या भिगोकर पीने से भी लाभ मिलता है। मानसून के दौरान इसे पाचन संबंधी सामान्य परेशानी में पारंपरिक घरेलू उपाय के रूप में लिया जाता है, लेकिन हर व्यक्ति पर इसका प्रभाव एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं है। किसी भी घरेलू उपाय की मात्रा और इस्तेमाल व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और अन्य दवाओं के अनुसार अलग हो सकता है।
अजवाइन का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से सर्दी, जुकाम और नाक बंद होने जैसी समस्याओं में भी किया जाता रहा है। आचार्य बालकृष्ण ने भी अजवाइन के साथ संतुलित आहार, साफ पानी, पर्याप्त आराम और नियमित दिनचर्या को महत्वपूर्ण बताया है। मानसून में दूषित भोजन और पानी कई बीमारियों का कारण बन सकते हैं, इसलिए खाद्य और पानी की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
साफ और सुरक्षित पानी पिएं।
ताजा और अच्छी तरह पका हुआ भोजन खाएं।
भोजन का समय नियमित रखने की कोशिश करें।
बाहर का अस्वच्छ या लंबे समय से रखा भोजन खाने से बचें।
पर्याप्त आराम और नींद लें।
लगातार गैस, पेट दर्द, उल्टी, दस्त या सांस संबंधी परेशानी होने पर डॉक्टर से सलाह लें।