Highlights
सोनाक्षी सिन्हा और जहीर इकबाल की तू है मेरी किरण में टाइम-ट्रैवल और सस्पेंस का अनोखा कॉन्सेप्ट है।
तू है मेरी किरण का पहला हाफ दिलचस्प है, लेकिन दूसरा हाफ कहानी को उलझा देता है।
कमजोर स्क्रीनप्ले और बेतुके ट्विस्ट तू है मेरी किरण की सबसे बड़ी कमियां हैं।
Tu Hai Mer Kiran Review: बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनाक्षी सिन्हा और जहीर इकबाल की फिल्म 'तू है मेरी किरण' एक अनोखे कॉन्सेप्ट के साथ दर्शकों के सामने आई है। फिल्म में टाइम-ट्रैवल, जुनून, ब्लैकमेलिंग और सस्पेंस का मिश्रण देखने को मिलता है। कहानी का शुरुआती हिस्सा दर्शकों की दिलचस्पी जगाता है, लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले और बेतुके ट्विस्ट के चलते फिल्म दूसरे हाफ में अपना असर खो देती है।
फिल्म की कहानी किरण मित्तल यानी सोनाक्षी सिन्हा के इर्द-गिर्द घूमती है, जो पहाड़ों में अपने पति रियांश यानी अंकित गुप्ता के साथ रहती हैं। पहली किताब की सफलता के बाद किरण दूसरी किताब लिखने के लिए संघर्ष कर रही हैं। उनकी निजी जिंदगी में भी कई परेशानियां हैं। इसी बीच उनकी मुलाकात समर यानी जहीर इकबाल से होती है, जो उनसे एकतरफा प्यार करता है।
कहानी में बड़ा मोड़ तब आता है, जब किरण को एक पुराना फोन मिलता है। इस फोन के जरिए उनकी बातचीत साल 2016 में मौजूद समर से होने लगती है, जबकि किरण साल 2026 में हैं। इसके बाद समर अतीत की घटनाओं को बदलने की कोशिश करता है। यहीं से ब्लैकमेलिंग और लगातार आने वाले ट्विस्ट कहानी को आगे बढ़ाते हैं।
'तू है मेरी किरण' का पहला हिस्सा सस्पेंस बनाए रखने में काफी हद तक सफल रहता है। टाइम-ट्रैवल का अनोखा विचार और शुरुआती मोड़ दर्शकों के मन में कई सवाल खड़े करते हैं। हालांकि, इंटरवल के बाद कहानी उलझती चली जाती है। फोन के भविष्य से जुड़ने और अतीत में बदलाव का वर्तमान पर पड़ने वाले असर जैसे सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं मिलते। लगातार आते ट्विस्ट कहानी को रोमांचक बनाने के बजाय उलझा देते हैं।
करण रावल का निर्देशन शुरुआत में प्रभावी लगता है, लेकिन दूसरे हाफ में कहानी पर पकड़ कमजोर पड़ जाती है। स्क्रीनप्ले जल्दबाजी में आगे बढ़ता है और साधारण संवाद सस्पेंस का असर कम कर देते हैं। हालांकि, अतानु मुखर्जी की एडिटिंग और बैकग्राउंड स्कोर कुछ हद तक फिल्म को संभालने की कोशिश करते हैं। दो अलग-अलग समय के बीच ट्रांजिशन तकनीकी रूप से अच्छे लगते हैं।
सोनाक्षी सिन्हा ने किरण के किरदार में अच्छा काम किया है। मुश्किल परिस्थितियों में उनकी बेचैनी और भावनाएं पर्दे पर नजर आती हैं। वहीं, जहीर इकबाल जुनूनी आशिक के किरदार में ठीक-ठाक प्रदर्शन करते हैं, लेकिन कमजोर लेखन उनके किरदार को पूरी तरह उभरने नहीं देता। अंकित गुप्ता, पूर्वेन्दु भट्टाचार्य और जरीना वहाब भी अपनी भूमिकाओं में ठीक हैं, लेकिन उनके किरदारों को पर्याप्त गहराई नहीं मिलती।
फिल्म देखें या नहीं
‘तू है मेरी किरण’ का कॉन्सेप्ट नया और दिलचस्प है, लेकिन कमजोर लेखन और उलझी हुई कहानी इसके प्रभाव को कम कर देते हैं। सोनाक्षी सिन्हा की एक्टिंग और शुरुआती सस्पेंस के लिए इसे देखा जा सकता है, लेकिन अगर आप मजबूत लॉजिक और कसावट वाली थ्रिलर की उम्मीद कर रहे हैं, तो यह फिल्म निराश कर सकती है।