Chaar Yaar Review: दमदार कलाकारों के बावजूद धीमी पड़ी चार यार की कहानी, सस्पेंस में कहां रह गई कमी
Highlights
'चार यार' प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई क्राइम-थ्रिलर वेब सीरीज है।
सीरीज में पूरव झा, नमन जैन, साकिब अयूब और प्रेरक मेहता मुख्य भूमिकाओं में हैं।
कहानी चार दोस्तों की है, जो अमीर बनने के लिए विंटेज कारें चुराने लगते हैं।
Purav Jha Web Series Chaar Yaar Review: ओटीटी प्लेटफॉर्म प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई वेब सीरीज 'चार यार' क्राइम और थ्रिलर पसंद करने वाले दर्शकों के लिए एक नई पेशकश है। पूरव झा, नमन जैन, साकिब अयूब और प्रेरक मेहता की मुख्य भूमिकाओं वाली यह सीरीज 2000 के दशक की मुंबई में चार दोस्तों की कहानी दिखाती है। हालांकि, दिलचस्प कॉन्सेप्ट होने के बावजूद सीरीज हर मोर्चे पर दर्शकों को बांधे रखने में कामयाब नहीं होती। नवभारत लाइव की ओर से वेब सीरीज ‘चार यार’ को 5 में से 2.5 स्टार दिए गए हैं।
सीरीज की कहानी चार दोस्तों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो जल्द अमीर बनने के लिए महंगी विंटेज कारें चुराने का रास्ता चुनते हैं। शुरुआत में यह उन्हें पैसे कमाने का आसान तरीका लगता है, लेकिन धीरे-धीरे वे अपराध की ऐसी दुनिया में पहुंच जाते हैं, जहां पुलिस और अंडरवर्ल्ड के बीच का खेल उनकी जिंदगी बदल देता है। कहानी में चोर-पुलिस की लुका-छिपी, गैंगस्टर्स का खौफ और दोस्तों की महत्वाकांक्षाएं देखने को मिलती हैं। यही कॉन्सेप्ट सीरीज को दिलचस्प बनाता है, लेकिन इसकी कमजोर पटकथा रोमांच को लगातार बनाए नहीं रख पाती।
अभिनय और निर्देशन कैसा है
विनय वैकुल के निर्देशन में बनी इस सीरीज का एक मजबूत पक्ष इसकी स्टार कास्ट है। राजेश तैलंग और सिकंदर खेर अपने किरदारों में गंभीरता और प्रभाव लेकर आते हैं। वहीं, चंकी पांडे भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं। साईं ताम्हणकर का अभिनय भी प्रभावित करता है, हालांकि उनके किरदार को और गहराई दी जा सकती थी। चारों मुख्य कलाकारों के बीच दोस्ती की केमिस्ट्री कहानी को शुरुआती हिस्से में सहज बनाती है। साथ ही, 2000 के दशक की मुंबई का माहौल दिखाने की कोशिश भी सराहनीय है।
कहां कमजोर पड़ती है सीरीज
'चार यार' की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी धीमी रफ्तार है। शुरुआती एपिसोड में कई घटनाएं एक साथ सामने आती हैं, जिससे कहानी का प्रवाह प्रभावित होता है। चारों दोस्तों की दोस्ती और उनके रिश्तों को पर्याप्त विस्तार नहीं मिलता, इसलिए दर्शक उनसे इमोशनल रूप से पूरी तरह जुड़ नहीं पाते। करीब 40 मिनट के एपिसोड कई जगह लंबे महसूस होते हैं। कमजोर संवाद और अनुमानित घटनाक्रम भी सस्पेंस को कम कर देते हैं।
चार यार देखें या नहीं
कुल मिलाकर, 'चार यार' का कॉन्सेप्ट दिलचस्प है और कलाकारों का अभिनय इसे संभालने की कोशिश करता है। लेकिन धीमी कहानी और कमजोर रोमांच के कारण यह एक यादगार क्राइम-ड्रामा नहीं बन पाती। अगर आप इस जॉनर के शौकीन हैं, तो इसे एक बार देख सकते हैं, लेकिन बहुत ज्यादा उम्मीदें लेकर न जाएं।
