Somi Ali on Govinda Sunita Controversy: हिंदी सिनेमा के फेमस एक्टर गोविंदा और उनकी पत्नी सुनीता आहूजा के बीच का मनमुटाव इन दिनों चर्चा के केंद्र में बना हुआ है। दोनों के बीच जारी खींचतान के बीच अब पूर्व एक्ट्रेस सोमी अली सामने आई हैं और उन्होंने खुले तौर पर 'हीरो नंबर 1' का पक्ष लिया है। गोविंदा के साथ काम कर चुकीं सोमी अली ने सुनीता आहूजा द्वारा कसे गए 'शुगर डैडी' वाले तंज पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी कलाकार का मूल्य उसकी या उसके साथ काम करने वाली सह-कलाकार की उम्र से तय नहीं होता, बल्कि उसकी काबिलियत और प्रतिभा सबसे ऊपर होती है।
गोविंदा और सुनीता के बीच का यह पारिवारिक और पेशेवर विवाद हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में आ गया है। जब हर कोई इस विषय पर अपनी अलग-अलग राय बना रहा था, तब सोमी अली ने सोशल मीडिया के जरिए एक पोस्ट शेयर किया।
उन्होंने अपनी बात को साफ-साफ से रखते हुए कहा कि वह इस मामले में खामोश नहीं बैठ सकतीं। जरूरत पड़ने पर वह गोविंदा के पक्ष में जरूर खड़ी होंगी, क्योंकि वह उन्हें निजी और व्यावसायिक दोनों स्तरों पर काफी लंबे समय से बेहद अच्छी तरह से जानती हैं।
सोमी अली ने गोविंदा के एक्टिंग कौशल और उनके बर्ताव की जमकर सराहना की है। उन्होंने कहा कि चीची हिंदी फिल्म जगत के सबसे हुनरमंद और विनीत कलाकारों में से एक रहे हैं। किसी अभिनेता की क्षमता को उसकी उम्र के चश्मे से देखना पूरी तरह से अनुचित है।
टैलेंट कभी पुराना नहीं होता और न ही उसकी कोई आखिरी तारीख होती है। अगर कोई कलाकार उल्टी परिस्थितियों में भी लगातार काम कर रहा है और आगे बढ़ रहा है, तो उस जज्बे का सम्मान किया जाना चाहिए, न कि उसका मजाक उड़ाया जाना चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब सुनीता आहूजा ने एक इंटरव्यू के दौरान गोविंदा द्वारा अपने से कम उम्र की एक्ट्रेसेस के साथ काम करने पर सवाल उठने पर 'शुगर डैडी' शब्द का इस्तेमाल कर दिया था।
इस बात से गोविंदा बेहद आहत हुए थे और उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था कि आपसी बातचीत में अभद्र भाषा का प्रयोग रिश्तों की मर्यादा को ठेस पहुंचाता है। गोविंदा के इस बयान के बाद ही सोमी अली ने आगे आकर गोविन्दा की पेशेवर साख को बनाए रखने के हक में आवाज उठाई है।
अपने पोस्ट के आखिरी हिस्से में सोमी अली ने कहा कि उम्र को कभी भी किसी ऐसे व्यक्ति के खिलाफ हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए, जो केवल अपनी आजीविका कमाने के लिए मेहनत कर रहा है।
जब फिल्म इंडस्ट्री या समाज किसी कलाकार को यह अहसास कराने लगे कि उसकी उम्र बीत चुकी है, तब भी हार न मानना ही एक सच्चे कलाकार की पहचान होती है। गोविंदा ने हमेशा अपनी शर्तों पर काम किया है और उनके इसी जुझारूपन का जश्न मनाया जाना चाहिए।