शाहिद कपूर कृति सेनन और रश्मिका मंदाना की कॉकटेल 2 रिव्यू (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया) 
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Cocktail 2 Review: आधुनिक रिश्तों की कहानी पेश करती है शाहिद कपूर कृति सेनन और रश्मिका मंदाना की कॉकटेल 2

Cocktail 2 Rating: शाहिद कपूर, कृति सेनन और रश्मिका मंदाना स्टारर 'कॉकटेल 2' आधुनिक रिश्तों, प्यार और इमोशनल उलझनों की संवेदनशील कहानी है। यह फिल्म दर्शकों के दिलों को छूने में सफल रहती है।

सोनाली झा

Shahid Kapoor Film Cocktail 2 Review: हर प्रेम कहानी को दर्शकों के दिलों तक पहुंचने के लिए बड़े पर्दे वाले हाई-वोल्टेज ड्रामे की ज़रूरत नहीं होती, यह बात 'कॉकटेल २' देखते हुए साफ महसूस होती है। यह फिल्म चीज़ों को उलझाने के बजाय बेहद सादे और सरल तरीके से पेश करती है। रिश्तों की पेचीदगियों को एक निष्पक्ष दर्शक की तरह देखते हुए, अपने किरदारों को पर्दे पर खुलकर जीने का मौका देना इस फिल्म की सबसे बड़ी खूबी है।

जहां पहली 'कॉकटेल' अपनी ग्लैमरस स्टाइल और हाई-एनर्जी के लिए जानी जाती है, वहीं यह भाग एक शांत, गंभीर और पूरी तरह से अलग रास्ता चुनता है। कहानी या मिजाज के मामले में इसका पिछली फिल्म से कोई सीधा ताल्लुक नहीं है; बल्कि यह आज की पीढ़ी के वास्तविक रिश्तों के करीब रहने वाली एक नई और गहरी दुनिया बुनती है। खास बात यह है कि 'नवभारत' ने इस फिल्म को 3.5 स्टार्स की रेटिंग दी है।

फिल्म की कहानी

फिल्म की पूरी कहानी कुणाल यानी शाहिद कपूर, एली यानी कृति सेनन और दिया यानी रश्मिका मंदाना के इर्द-गिर्द घूमती है। ये तीनों लोग अपनी भावनाओं के स्तर पर तो साफ हैं, लेकिन जिंदगी के अहम फैसले लेते वक्त बुरी तरह उलझे हुए हैं। यहाँ प्यार और अपनापन तो भरपूर है, पर साथ ही झिझक और भ्रम की एक महीन परत भी है। किरदारों के बीच की यही इमोशनल खींचतान कहानी को आगे बढ़ाती है।

फिल्म की बड़ी खासियत

फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसका यथार्थवाद (रियलिज्म) है। ये किरदार कोई बड़े पर्दे के अजेय नायक नहीं, बल्कि हमारे-आपके जैसे आम लोग हैं, जो कभी-कभी सही शब्दों का चुनाव नहीं कर पाते, अपनी भावनाओं को समझने के लिए संघर्ष करते हैं और अक्सर उन्हें सच का एहसास तब होता है जब काफी देर हो चुकी होती है। तरुण जैन की पटकथा और लव रंजन की कहानी इसी ईमानदारी पर टिकी है, और इसके संवाद रोजमर्रा की जिंदगी जैसे बेहद स्वाभाविक लगते हैं।

फिल्म का अभिनय

शाहिद कपूर ने अपने सधे हुए अभिनय से पूरी फिल्म को एक सूत्र में बांधकर रखा है। भावनाओं का दिखावा करने के बजाय, वे केवल अपनी खामोशी और आंखों के हाव-भाव से बहुत कुछ कह जाते हैं। उनका एक इमोशनल ब्रेकडाउन सीन और क्लाइमेक्स का मोनोलॉग दर्शकों को लंबे समय तक याद रहेगा। रश्मिका मंदाना ने 'दिया' के किरदार में एक कोमलता और संवेदनशीलता को बखूबी उभारा है। उनके अभिनय का यह सहज और मासूम अंदाज कहीं भी बनावटी नहीं लगता।

फिल्म का निर्देशन

दूसरी ओर, कृति सेनन तीनों कलाकारों में सबसे संतुलित और गंभीर नजर आती हैं। उन्होंने बेहद आत्मविश्वास और समझदारी से अपना किरदार निभाया है, जो कहानी के इमोशनल उतार-चढ़ाव को एक खूबसूरत ठहराव देता है। निर्देशक होमी अदजानिया ने कहानी को बिना किसी फालतू ड्रामे के पर्दे पर उतारा है, और यही संयम फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बन गया है।

तकनीकी पक्ष और संगीत

विजुअल के स्तर पर यह फिल्म बेहद खूबसूरत और आंखों को सुकून देने वाली है। सिलसिला की शानदार लोकेशन को सिर्फ दिखावे के लिए इस्तेमाल नहीं किया गया है, बल्कि वे कहानी का एक अहम हिस्सा बनकर उभरती हैं, जिसका श्रेय सिनेमैटोग्राफर संथाना कृष्णन रविचंद्रन के बेहतरीन कैमरा वर्क को जाता है। अनाइता श्रॉफ अदजानिया की कॉस्ट्यूम स्टाइलिंग आधुनिक है और किरदारों के व्यक्तित्व पर पूरी तरह फबती है। प्रीतम का संगीत कहानी के प्रवाह में बाधा नहीं बनता, बल्कि उसी में रच-बस जाता है।

फिल्म का निष्कर्ष

संक्षेप में कहें तो, 'कॉकटेल 2' खुद को, अपने साथी को और आज के आधुनिक रिश्तों के बीच की दूरियों को समझने का एक भावुक सफर है। आज के दौर के रिश्ते असुरक्षा, निजी आजादी और सोशल मीडिया के असर से किस तरह प्रभावित हो रहे हैं, इसका एक सच्चा आईना यहां देखने को मिलता है। कुछ जगहों पर कहानी थोड़ी और गहरी तथा कसी हुई हो सकती थी, लेकिन इसके बावजूद फिल्म अपनी इमोशनल पकड़ कहीं भी ढीली नहीं होने देती।

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