Shafi Inamdar Birthday Special: हिंदी फिल्म जगत और टेलीविजन की दुनिया में कुछ कलाकारों ने अपनी एक्टिंग का ऐसा सिक्का जमाया है, जिसने हर दर्शक के दिल में एक खास जगह बना दी। इन्हीं कलाकारों की लिस्ट में एक नाम शफी इनामदारका भी शामिल हैं।
शफी इनामदारवो कलाकार है जिन्होंने फिल्मों में आम आदमी का किरदार निभाने से लेकर दूरदर्शन के लोकप्रिय सीरियल ये जो है जिंदगी तक अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। हालांकि काफी कम उम्र में ही इस एक्टर ने दुनिया को अलविदा कह दिया था।
शफी इनामदार का जन्म 23 अक्टूबर 1945 को बॉम्बे, यानी आज के मुंबई में हुआ था। उन्होंने अपनी पढ़ाई महाराष्ट्र के अलग-अलग स्थानों से पूरी की। स्कूल के दिनों से ही उनकी रुचि एक्टिंग में रही थी। वो ना सिर्फ स्कूल में नाटकों में भाग लेते थे, बल्कि भाषण और वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में भी जमकर आगे रहते थे। उनका ये जुनून समय के साथ बढ़ता ही रहा था। आगे चलकर अपने इस पेशन को उन्होंने प्रोफेशन में बदलने का फैसला लिया।
साल 1984 में दूरदर्शन पर ऑन एयर हुए सीरियल ये जो है जिंदगी ने शफी इनामदार को घर-घर में पहचान दिलाई। उस दौर में यह शो बेहद लोकप्रिय हुआ था। शुक्रवार रात 9 बजे प्रसारित होने वाले इस सीरियल को देखने के लिए दर्शक बेसब्री से इंतजार करते थे।
ये टीवी सीरियल उस समय इतना फेमस हो गया था कि इसका असर बिजनेस पर भी दिखने लगा था। बताया जाता है कि इस शो का क्रेज ऐसा था कि शुक्रवार को रात 9 बजे सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता था। पहले शो के मेकर्स ने इस शो के 13 एपिसोड ही बनाने का फैसला लिया था, लेकिन शो की लोकप्रियता को देखकर इस सीरियल के 40 और एपिसोड शूट किए गए थे।
शफी इनामदार की शुरुआती फिल्मी उपस्थिति शशि कपूर द्वारा निर्मित और गोविंद निहलानी के निर्देशन में बनी फिल्म विजेता में देखने को मिली। हालांकि, उन्हें खास पहचान फिल्म अर्ध सत्य से मिली। इसके बाद उन्होंने आज की आवाज, आवाम और दहलीज जैसी फिल्मों में काम किया। शफी इनामदार को पर्दे पर आम आदमी के किरदारों में खास तौर पर पसंद किया गया। उनका अभिनय सहज और वास्तविक लगता था, जिसकी वजह से दर्शक उनके किरदारों से जुड़ाव महसूस करते थे।
शफी इनामदार का निधन 13 मार्च 1996 को हुआ था। रिपोर्टों के अनुसार, वह क्रिकेट मैच देख रहे थे, तभी उन्हें दिल का दौरा पड़ा। उनके अचानक चले जाने से मनोरंजन जगत और उनके प्रशंसकों को गहरा सदमा लगा। अपने पीछे वह फिल्मों और टेलीविजन में किए गए यादगार काम की विरासत छोड़ गए।