Sadhana Hairstyle Fashion Icon: हिंदी सिनेमा का इतिहास कई ऐसी महान हस्तियों की कहानियों से सजा हुआ है, जिन्होंने पर्दे पर आते ही एक नया दौर शुरू कर दिया। 60 के दशक में जब सिनेमा अपनी पहचान बना रहा था, तब एक ऐसी एक्ट्रेस ने कदम रखा जिसने न केवल एक्टिंग के नए मानदंड स्थापित किए, बल्कि फैशन की दुनिया की तस्वीर भी बदलकर रख दी। उनका नाम था साधना शिवदासानी। कराची की गलियों से शुरू हुआ उनका यह सफर मुंबई के चमकते हुए रुपहले पर्दे तक पहुंचा। अपनी खूबसूरती, सादगी और दिलकश मुस्कान से साधना ने दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बनाई।
साधना का जन्म 2 सितंबर 1941 को पाकिस्तान के कराची शहर में एक सिंधी परिवार में हुआ था। वह अपने माता-पिता की इकलौती बेटी थीं। जब देश का बंटवारा हुआ, तो उनका परिवार अपनी पुरानी यादों और जड़ों को छोड़कर मुंबई आ गया। साधना के पिता 1930 के दशक की फेमस एक्ट्रेस साधना बोस के बहुत बड़े फैन थे। इसी पसंद के कारण उन्होंने अपनी नन्हीं बेटी का नाम साधना रखा था। आगे चलकर इसी नाम ने भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक नया अध्याय लिखा।
साधना का एक्टिंग से लगाव बहुत कम उम्र में ही हो गया था। महज 14 साल की उम्र में उन्होंने राज कपूर की फेमस फिल्म 'श्री 420' के एक गाने में बैकग्राउंड डांसर के रूप में काम किया था। इसके बाद 16 साल की उम्र में उन्हें सिंधी फिल्म 'अबाना' में अहम किरदार निभाने का मौका मिला। इस फिल्म के लिए उन्हें मेहनताने के तौर पर केवल 1 रुपये की सांकेतिक राशि दी गई थी। शुरुआती दौर में ही राज कपूर के साथ काम करने के दौरान कुछ ऐसी बातें हुईं कि दोनों के रिश्तों में दूरी आ गई।
'अबाना' फिल्म के रिलीज होने के बाद एक पत्रिका में साधना की तस्वीर छपी, जिसने उस दौर के बड़े प्रोड्यूसर सशाधर मुखर्जी का ध्यान खींचा। उन्होंने साधना को अपनी फिल्म 'लव इन शिमला' से लॉन्च करने का फैसला किया। फिल्म के निर्देशक आरके नैय्यर को साधना का माथा थोड़ा बड़ा लगता था। इस समस्या को हल करने के लिए उन्होंने हॉलीवुड एक्ट्रेस ऑड्रे हेपबर्न की तर्ज पर साधना के बाल आगे से काटकर माथे पर बिखेर दिए। यह नया हेयरस्टाइल इतना फेमस हुआ कि इसे 'साधना कट' कहा जाने लगा और उस दौर की हर लड़की इसे अपनाने लगी।
साल 1964 में आई रहस्यमयी फिल्म 'वो कौन थी' ने भारतीय सिनेमा को एक ऐसा गीत दिया जिसकी गूंज दशकों बाद भी कम नहीं हुई है। इस फिल्म में लता मंगेशकर द्वारा गाया गया गाना 'लग जा गले से फिर' साधना पर फिल्माया गया था। इस गाने की धुन और उसके भाव इतने गहरे थे कि इसने लोगों के दिलों पर गहरा असर छोड़ा।
सफलता की ऊंचाइयों को छूने वाली साधना की पर्सनल लाइफ में कई उतार-चढ़ाव आए। साल 1995 में उनके पति आरके नैय्यर का निधन हो गया, जिसके बाद वह पूरी तरह अकेली पड़ गईं। जीवन के आखिरी पड़ाव में उन्हें थायराइड की गंभीर बीमारी हो गई, जिसने उनकी आंखों की रोशनी और रूप-रंग पर गहरा असर डाला। उन्होंने खुद को चमक-धमक वाली दुनिया से पूरी तरह अलग कर लिया। मुंबई के एक पुराने किराये के बंगले में रहते हुए उन्होंने अपने आखिरी दिन बहुत ही सादगी और गुमनामी के बीच बिताए।