Rajesh Khanna Last Words: भारतीय सिनेमा के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना का नाम जुबां पर आते ही एक ऐसा जादू बिखर जाता है जिसकी चमक आज भी फीकी नहीं पड़ी है। 18 जुलाई के ही दिन इस महान एक्टर ने दुनिया को अलविदा कहा था। वे कैंसर जैसी घातक बीमारी से जूझ रहे थे। जीवन के आखिरी पड़ाव में जब दवाइयों ने असर करना बंद कर दिया था, तब राजेश खन्ना अपनी मौत से करीब 20 दिन पहले ही परिवार से कह दिया था कि अब उनका समय आ चुका है।
कैंसर एक जानलेवा बीमारी जरूर है, लेकिन अगर सही समय पर इसके लक्षणों को पहचान लिया जाए तो इसका सफल इलाज संभव है। राजेश खन्ना को अपनी मौत से लगभग डेढ़ साल पहले पता चला था कि वे कैंसर की चपेट में आ चुके हैं। इसके बाद उनका लंबा इलाज चला, लेकिन आखिरी दिनों में स्थिति बिगड़ती चली गई। जब राजेश खन्ना को अहसास हुआ कि अब इलाज भी बेअसर हो रहा है, तो उन्होंने बेहद भावुक होकर अपने परिवार से कहा था कि लगता है मेरा टाइम आ गया है। उनके ये शब्द आज भी उनके फैंस की आंखें नम कर देते है।
अमृतसर में जन्मे इस महान कलाकार का असली नाम जतिन खन्ना था, जिन्हें बंटवारे के बाद बॉम्बे के उनके धनी रिश्तेदारों ने गोद लिया था। बचपन से ही थिएटर की दुनिया में रुचि रखने वाले जतिन ने एक टैलेंट कॉन्टेस्ट जीतकर मुंबई में कदम रखा था। फिल्मों में आने के बाद उनका नाम बदलकर राजेश खन्ना किया गया और साल 1969 में आई आराधना फिल्म ने उनके करियर की दिशा ही बदल दी।
इसके बाद उन्होंने लगातार 17 सुपरहिट फिल्में देकर एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया जो आज तक अटूट है। लड़कियों द्वारा उनकी गाड़ियों की धूल से मांग भरना और खून से खत लिखना उनके बेमिसाल स्टारडम की गवाही देता है। अपनी मृत्यु से कुछ समय पहले उन्होंने अपनी आवाज में एक ऑडियो संदेश भी रिकॉर्ड किया था, जिसमें उन्होंने नम आंखों से अपने सभी फैंस को इस बेपनाह मोहब्बत के लिए शुक्रिया कहा था।
राजेश खन्ना की पर्सनल लाइफ काफी उतार-चढ़ाव भरी रही। उन्होंने साल 1973 में डिंपल कपाड़िया से शादी की थी, जिससे उनकी दो बेटियां ट्विंकल और रिंकी हुईं। हालांकि 80 के दशक की शुरुआत में दोनों अलग रहने लगे थे, लेकिन उन्होंने कभी कानूनी तौर पर तलाक नहीं लिया।
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जब राजेश खन्ना के जीवन के सबसे कठिन दौर से गुजर रहे थे, तब डिंपल कपाड़िया उनके पास लौट आईं और आखिरी समय तक उनकी तीमारदारी की। राजेश खन्ना के निधन के बाद जब उनके आलीशान बंगले की जांच की गई, तो वहां उपहारों से लदे 65 बंद सूटकेस मिले। वे जब भी विदेश दौरों पर जाते थे, तो अपने करीबियों के लिए ढेर सारे तोहफे लाते थे, जिन्हें देना वे अक्सर भूल जाया करते थे।