परवीन बॉबी (फोटो क्रेडिट-सोशल मीडिया)  
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सफलता, रिश्तों और बीमारी के बीच उलझी जिंदगी, जानें कैसे अकेलेपन में खत्म हुई परवीन बॉबी की दर्दभरी कहानी

Parveen Babi का फिल्मी सफर कॉलेज से शुरू होकर बॉलीवुड के शिखर तक पहुंचा। अमिताभ बच्चन संग हिट फिल्मों ने उन्हें स्टार बनाया। सफलता के बावजूद निजी जिंदगी और बीमारी ने उन्हें अकेलेपन की ओर धकेल दिया।

सोनाली झा

Parveen Babi Birth Anniversary Special Story: बॉलीवुड की दिग्गज एक्ट्रेस परवीन बॉबी ने 70 और 80 के दशक में अपनी एक अलग पहचान बनाई। उनका फिल्मी सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था। अहमदाबाद में पढ़ाई के दौरान एक दिन कॉलेज के पास चल रही फिल्म शूटिंग देखने पहुंचीं परवीन पर डायरेक्टर बी आर इशारा की नजर पड़ी और यहीं से उनकी जिंदगी बदल गई।

साल 1973 में फिल्म ‘चरित्र’ से उन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा। हालांकि यह फिल्म खास सफल नहीं रही, लेकिन परवीन की स्क्रीन प्रेजेंस ने सबका ध्यान खींचा। इसके बाद 1974 में आई ‘मजदूर’ में अमिताभ बच्चन के साथ उनकी जोड़ी ने दर्शकों को प्रभावित किया। असली पहचान उन्हें 1975 की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘दीवार’ से मिली, जिसने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया।

सुपरहिट फिल्मों की चमक

‘अमर अकबर एंथनी’, ‘शान’, ‘नमक हलाल’ और ‘काला पत्थर’ जैसी फिल्मों के जरिए परवीन बॉबी ने खुद को इंडस्ट्री की टॉप एक्ट्रेस के रूप में स्थापित किया। खास बात यह रही कि उनकी जोड़ी अमिताभ बच्चन के साथ बेहद हिट रही और दर्शकों ने दोनों को खूब पसंद किया। उस दौर में वह सबसे ज्यादा फीस लेने वाली अभिनेत्रियों में शामिल थीं।

फैशन और स्टाइल की ट्रेंडसेटर

परवीन बॉबी सिर्फ अपनी एक्टिंग के लिए ही नहीं, बल्कि अपने मॉडर्न और वेस्टर्न लुक के लिए भी जानी जाती थीं। जब ज्यादातर अभिनेत्रियां पारंपरिक अंदाज में नजर आती थीं, तब परवीन ने हिंदी सिनेमा में ग्लैमर और स्टाइल का नया ट्रेंड सेट किया। 1976 में उन्हें अंतरराष्ट्रीय मैगजीन ‘टाइम’ के कवर पेज पर जगह मिली, जो किसी भी भारतीय एक्ट्रेस के लिए बड़ी उपलब्धि थी।

निजी जिंदगी और संघर्ष

फिल्मी सफलता के बावजूद परवीन बॉबी की निजी जिंदगी उतनी आसान नहीं रही। परवीन बॉबी का नाम महेश भट्ट, कबीर बेदी और डैनी डेन्जोंगपा के साथ जुड़ा, लेकिन रिश्तों में उन्हें स्थिरता नहीं मिल सकी। इसी दौरान परवीन बॉबी को पैरानॉयड सिजोफ्रेनिया जैसी गंभीर मानसिक बीमारी हो गई, जिसने उनके जीवन को गहराई से प्रभावित किया।

अकेलेपन में खत्म हुआ जीवन

1983 में परवीन बॉबी ने अचानक फिल्म इंडस्ट्री छोड़ दी और विदेश चली गईं। कई साल बाद वापसी के बावजूद वह पहले जैसा मुकाम हासिल नहीं कर सकीं। धीरे-धीरे उन्होंने खुद को दुनिया से अलग कर लिया। 22 जनवरी 2005 को मुंबई स्थित उनके फ्लैट में उनका निधन हो गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी मौत बीमारी और कई दिनों तक भूखे रहने के कारण हुई।

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