एम जी रामचंद्रन (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम) 
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Birthday Special: ढाई साल की उम्र में पिता को खोया, अभिनय से बदली किस्मत, जानें एम जी रामचंद्रन की कहानी

M G Ramachandran Career: ढाई साल की उम्र में पिता को खोने वाले एम जी रामचंद्रन ने संघर्षों से निकलकर साउथ सिनेमा के सुपरस्टार और तमिलनाडु के लोकप्रिय मुख्यमंत्री बनने तक का सफर तय किया।

सोनाली झा

M.G Ramchandran Birthday Special: तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज अभिनेता एम जी रामचंद्रन का नाम सिर्फ साउथ सिनेमा ही नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति के इतिहास में भी सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। अभिनय, लोकप्रियता और जनसेवा तीनों क्षेत्रों में उन्होंने जो मुकाम हासिल किया, वह आज भी मिसाल माना जाता है। एमजीआर का पूरा नाम मारुथर गोपाल रामचंद्रन था और उनका जन्म एक मलयाली परिवार में श्रीलंका में हुआ था।

एमजीआर का बचपन संघर्षों से भरा रहा। महज ढाई साल की उम्र में उनके पिता का निधन हो गया, जिसके बाद उनकी मां उन्हें लेकर केरल आ गईं। गरीबी और कठिन हालात के बीच एमजीआर ने पढ़ाई जारी रखी। स्कूल के दिनों से ही उन्हें अभिनय, नृत्य और तलवारबाजी का शौक था। वे स्कूल ग्रुप के साथ नाटकों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेते थे। यहीं से उनके अभिनय करियर की नींव पड़ी।

एम जी रामचंद्रन का फिल्मी करियर

साल 1936 में एमजीआर ने फिल्म ‘साथी लीलावती’ से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की। शुरुआती संघर्ष के बाद 1950 के दशक में उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। 1954 में आई फिल्म ‘मलैक्कलन’ ने उन्हें स्टार बना दिया। उन्होंने तमिल सिनेमा की पहली रंगीन फिल्म ‘अलीबाबावुम 40 थिरुडर्गलुम’ में भी काम किया। 1972 की फिल्म ‘रिक्शावकरन’ के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। 1987 में रिलीज हुई ‘उलगम सुथी पारु’ उनकी आखिरी फिल्म साबित हुई।

एम जी रामचंद्रन की राजनीति करियर

फिल्मों में अपार सफलता के बाद एमजीआर ने राजनीति का रुख किया। उन्होंने 1953 में डीएमके पार्टी जॉइन की और 1962 में विधान परिषद के सदस्य बने। हालांकि, भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया। इसके बाद उन्होंने 1972 में एआईएडीएमके की स्थापना की। 1977 में वे तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने और लगातार जनता के बीच बेहद लोकप्रिय रहे। 1988 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया।

जयललिता संग किए 28 फिल्में

एमजीआर का निजी जीवन भी चर्चा में रहा। उनका नाम अभिनेत्री जयललिता के साथ जुड़ा था। दरअसल जब जयललिता फिल्मों में आई थी तब तक एमजी रामचंद्रन दक्षिण भारतीय फिल्मों के बहुत बड़े स्टार बन गए थे। उन दोनों ने साथ में 28 फिल्में दी थी। हालांकि जयललिता ने हमेशा उन्हें अपना मेंटर बताया। एम जी रामचंद्रन की कहानी यह साबित करती है कि संघर्ष, कला और जनसेवा के दम पर इंसान इतिहास रच सकता है।

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