महमूद अली (फाइल फोटो)
मनोरंजन

महमूद ने राजीव गांधी को समझ लिया था नया कलाकार, फिल्म में लेने के लिए तुरंत निकाल दिए थे 5 हजार रुपये

Mehmood And Rajiv Gandhi Story: महमूद की बर्थ एनिवर्सरी पर जानिए राजीव गांधी से जुड़ा दिलचस्प किस्सा। बताया जाता है कि अमिताभ बच्चन के साथ राजीव गांधी को देखकर महमूद उन्हें नया एक्टर समझ बैठे थे।

यति सिंह

Mehmood Birth Anniversary Special: हिंदी सिनेमा के दिग्गज कॉमेडियन महमूद ने अपनी कॉमेडी से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। चार दशक से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने अभिनय के अलावा फिल्म निर्माण और निर्देशन में भी हाथ आजमाया। महमूद की जिंदगी से जुड़े कई किस्से आज भी फिल्मी दुनिया में मशहूर हैं। ऐसा ही एक दिलचस्प किस्सा पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और अमिताभ बच्चन से जुड़ा है।

लेखक हनीफ जवेरी की किताब ‘महमूद: ए मैन ऑफ मैनी मूड्स’ में इस किस्से का जिक्र मिलता है। बताया जाता है कि ‘बॉम्बे टू गोवा’ की रिलीज से पहले अमिताभ बच्चन अपने एक युवा दोस्त को दिल्ली से मुंबई लेकर आए थे। महमूद ने जब उस युवक को देखा तो उन्हें लगा कि वह बेहद स्मार्ट और आकर्षक है। उन्हें लगा कि वह आगे चलकर एक बड़ा स्टार बन सकता है।

महमूद अली

5 हजार रुपये लेकर पहुंचे थे भाई के पास

महमूद ने तुरंत 5 हजार रुपये निकाले और अपने भाई अनवर अली को देते हुए कहा कि ये पैसे अमिताभ के दोस्त को दे दो। उनका इरादा उस युवक को अपनी अगली फिल्म के लिए साइन करने का था। हालांकि, अनवर अली ने उन्हें बताया कि वह कोई नया अभिनेता नहीं, बल्कि राजीव गांधी हैं, जो उस समय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेटे थे। यह सुनकर महमूद ने तुरंत पैसे वापस ले लिए। बताया जाता है कि इस घटना पर अमिताभ और राजीव गांधी दोनों खूब हंसे थे।

अमिताभ को भी महमूद ने दिया था बड़ा मौका

महमूद ने सिर्फ राजीव गांधी को ही अपनी फिल्म में लेने की इच्छा नहीं जताई थी, बल्कि उन्होंने अमिताभ बच्चन की प्रतिभा को भी पहचाना था। ‘बॉम्बे टू गोवा’ में अमिताभ को महत्वपूर्ण मौका मिला। बाद में जब राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री बने, तो अमिताभ ने मजाकिया अंदाज में कहा था कि महमूद की बात आखिरकार सच हो गई। राजीव वास्तव में इंटरनेशनल स्टार बने, लेकिन फिल्म इंडस्ट्री में नहीं बल्कि राजनीति के क्षेत्र में।

बचपन से ही शुरू हुआ था फिल्मों का सफर

महमूद अली का जन्म 29 सितंबर 1932 को बॉम्बे (अब मुंबई) में हुआ था। उनके पिता मुमताज अली जाने-माने डांसर और अभिनेता थे। हालांकि, परिवार में फिल्मी माहौल होने के बावजूद उनका बचपन आर्थिक परेशानियों से भरा रहा। उन्होंने कम उम्र में काम करना शुरू किया और 1943 की फिल्म ‘किस्मत’ में बतौर बाल कलाकार नजर आए।

बाद में उन्होंने कई छोटे-मोटे काम किए और फिल्ममेकर पी.एल. संतोषी के ड्राइवर के तौर पर भी काम किया। फिल्मों में छोटे रोल करते हुए उन्होंने अपनी पहचान बनाई। ‘दो बीघा जमीन’ और ‘प्यासा’ के बाद 1958 की ‘परवरिश’ उनके करियर में अहम मोड़ साबित हुई।

कॉमेडी से बनाया अलग मुकाम

1960 और 70 के दशक में एक्टर महमूद की कॉमेडी का ऐसा दौर आया कि वह घर-घर में पहचाने जाने लगे। ‘गुमनाम’, ‘प्यार किए जा’, ‘पड़ोसन’, ‘बॉम्बे टू गोवा’, ‘दो फूल’, ‘कुंवारा बाप’ और ‘सबसे बड़ा रुपैया’ जैसी फिल्मों में उनके किरदार खूब पसंद किए गए। ‘पड़ोसन’ का मास्टर पिल्लई आज भी उनकी यादगार भूमिकाओं में गिना जाता है।

महमूद ने अपने करियर में 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया और चार फिल्मफेयर अवॉर्ड भी जीते। 23 जुलाई 2004 को 71 साल की उम्र में अमेरिका के पेंसिल्वेनिया में उनका निधन हो गया। हालांकि, उनकी कॉमेडी और फिल्मों से जुड़े किस्से आज भी दर्शकों के बीच उनकी यादों को जिंदा रखते हैं।

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