Jacqueline Fernandez Money Laundering Case: 200 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग और जबरन वसूली मामले में बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस को लेकर चल रही कानूनी कार्यवाही में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने अभिनेत्री की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। इसके बाद अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट की नई पीठ के समक्ष सुना जाएगा।
सुनवाई के दौरान जस्टिस मिश्रा ने कहा कि वह इस मामले में आगे कार्यवाही नहीं कर सकते क्योंकि इस प्रकरण से जुड़े एक अन्य मामले में उनके बेटे की वकालत से संबंधित भूमिका है। न्यायिक निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से उन्होंने स्वयं को मामले की सुनवाई से अलग करने का फैसला लिया। सुप्रीम कोर्ट ने अब इस मामले को 24 जून के लिए दर्ज किया है। उस दिन नई पीठ यह तय करेगी कि अभिनेत्री की याचिका पर आगे किस प्रकार की सुनवाई की जाएगी।
न्यायालय के इस कदम को न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जैकलीन फर्नांडिस ने दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट द्वारा 30 मई को दिए गए आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। ट्रायल कोर्ट ने अपने आदेश में जैकलीन, सुकेश चंद्रशेखर, उनकी पत्नी लीना पॉल और अन्य आरोपितों के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत आरोप तय करने का निर्देश दिया था।
अभिनेत्री का कहना है कि उनके खिलाफ उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आरोप तय करना उचित नहीं है। इसी आधार पर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द करने की मांग की है। जैकलीन का दावा है कि उन्हें इस कथित अपराध में शामिल नहीं माना जाना चाहिए और उनके खिलाफ आरोप तय करने का निर्णय कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है। अब इस दलील पर सुप्रीम कोर्ट की नई बेंच विचार करेगी।
यह मामला कथित 200 करोड़ रुपये की जबरन वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है, जिसकी जांच ईडी कर रही है। जांच एजेंसी के अनुसार, सुकेश चंद्रशेखर ने जेल में रहते हुए एक कारोबारी की पत्नी से करोड़ों रुपये की ठगी और वसूली की थी। ईडी का आरोप है कि इस कथित अपराध से प्राप्त धन का उपयोग कई लोगों को लाभ पहुंचाने में किया गया।
एजेंसी का दावा है कि जैकलीन फर्नांडिस को सुकेश की ओर से महंगी कारें, कीमती आभूषण, लग्जरी बैग और अन्य मूल्यवान उपहार दिए गए थे। इसके अलावा अभिनेत्री के कुछ पारिवारिक सदस्यों को भी आर्थिक लाभ पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं। अब 24 जून को होने वाली सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं, जहां इस हाई-प्रोफाइल मामले में आगे की दिशा तय होगी।