जिंदगी ना मिलेगी दोबारा (फोटो क्रेडिट- सोशल मीडिया) 
मनोरंजन

'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा' के 15 साल पूरे, जिंदगी जीने का नया नजरिया देने वाली फिल्म आज भी है लोगों की फेवरेट

Zindagi Na Milegi Dobara 15 Years: 'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा' ने रिलीज के 15 साल पूरे कर लिए हैं। इस फिल्म ने दोस्ती, एडवेंचर और जिंदगी को खुलकर जीने का संदेश देकर पूरी एक पीढ़ी को प्रेरित किया।

सोनाली झा

Zindagi Na Milegi Dobara 15 Years Anniversary: साल 2011 में रिलीज हुई फिल्म 'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा' आज अपनी रिलीज के 15 साल पूरे कर चुकी है। इतने लंबे समय के बाद भी यह फिल्म सिर्फ एक मनोरंजक कहानी नहीं, बल्कि जिंदगी को देखने का एक नजरिया मानी जाती है। दोस्ती, प्यार, रिश्ते, आत्म-खोज और जिंदगी को खुलकर जीने का संदेश देने वाली इस फिल्म ने दर्शकों के दिलों में एक ऐसी जगह बनाई, जो आज भी बरकरार है।

फिल्म की कहानी बचपन के तीन दोस्तों अर्जुन यानी ऋतिक रोशन, कबीर यानी अभय देओल और इमरान यानी फरहान अख्तर के इर्द-गिर्द घूमती है। कबीर की बैचलर पार्टी के लिए तीनों स्पेन की रोड ट्रिप पर निकलते हैं। इस सफर में वे रोमांच, डर, प्यार और रिश्तों के कई ऐसे अनुभवों से गुजरते हैं, जो उनकी सोच और जिंदगी दोनों बदल देते हैं। फिल्म यह सिखाती है कि जिंदगी को डर, पछतावे और सामाजिक दबाव से नहीं, बल्कि पूरे जुनून और खुलकर जीना चाहिए।

हर पीढ़ी के दिल में बस गई फिल्म

जोया अख्तर के निर्देशन में बनी इस फिल्म में ऋतिक रोशन, फरहान अख्तर, अभय देओल, कैटरीना कैफ और कल्कि कोचलिन ने दमदार अभिनय किया। सभी कलाकारों की शानदार केमिस्ट्री और भावनात्मक कहानी ने फिल्म को एक क्लासिक बना दिया। फिल्म ने एडवेंचर ट्रैवल, रोड ट्रिप, स्कूबा डाइविंग, स्काई डाइविंग और 'बकेट लिस्ट' जैसी सोच को युवाओं के बीच लोकप्रिय बनाने में भी बड़ी भूमिका निभाई।

डायलॉग और शायरी आज भी लोगों की जुबां पर

फिल्म के सबसे मजबूत पहलुओं में से एक इसके संवाद और शायरी रहे, जिन्हें मशहूर गीतकार जावेद अख्तर ने लिखा था। दिलों में तुम अपनी बेताबियां लेकर चल रहे हो तो जिंदा हो तुम जैसी पंक्तियां आज भी लोगों को प्रेरित करती हैं। वहीं आज का मजा लो, मेरे दोस्त जैसे संवाद जिंदगी के हर पल को जीने का संदेश देते हैं और फिल्म की पहचान बन चुके हैं।

संगीत और उपलब्धियों ने बनाया यादगार

फिल्म का संगीत भी इसकी सफलता का बड़ा कारण रहा। दिल धड़कने दो, ख्वाबों के परिंदे, सेनोरिटा, इक जूनून और सूरज की बाहों में जैसे गाने आज भी लोगों की प्लेलिस्ट का हिस्सा हैं। 'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा' ने 59वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में बेस्ट कोरियोग्राफी और बेस्ट ऑडियोग्राफी समेत दो राष्ट्रीय पुरस्कार भी अपने नाम किए। 15 साल बाद भी यह फिल्म दर्शकों को यही याद दिलाती है कि जिंदगी बार-बार नहीं मिलती।

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