देवानंद की दरियादिली: फैंस ने समझा शम्मी कपूर, तो एक्टर ने मुस्कुराकर कहा 'हां, मैं ही हूं', पुण्यतिथि पर यादें ताजा 
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'हां, मैं शम्मी कपूर हूं' देवानंद की पुण्यतिथि पर जानें लेबनान का मजेदार किस्सा, पढ़ें अनसुनी बातें

Dev Anand की पुण्यतिथि पर सायरा बानो ने किस्सा बताया कि कैसे लेबनान में उन्हें भीड़ ने शम्मी कपूर समझा। देवानंद ने मुस्कुराकर कहा 'हां, मैं ही हूं'। फैंस के लिए उन्होंने गुपचुप ऑपरेशन करवाया था।

अनिल सिंह

Dev Anand Death Anniversary: भारतीय सिनेमा में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं जो सिर्फ हीरो नहीं, बल्कि एक परमानेंट इमोशन बन जाते हैं। ऐसे ही थे धर्मदेव पिशोरीमल आनंद यानी देवानंद, जिन्हें हिंदी सिनेमा का 'देव' कहा जाता है। आज (3 दिसंबर) उनकी पुण्यतिथि पर, उनकी अमर फिल्मों के साथ उनकी जिंदगी के मजेदार और दिलदार किस्से भी याद किए जा रहे हैं।

देवानंद ने अपने अनूठे स्टाइल, कभी न हार मानने वाले जज्बे और हमेशा मुस्कुराते रहने के तरीके से करोड़ों दिलों पर राज किया। उनका हर मुश्किल को स्टाइल में पार करना और फैंस को कभी निराश न करना, यही उनका तरीका था।

जब देवानंद को भीड़ ने समझा शम्मी कपूर

दिग्गज अभिनेत्री सायरा बानो ने देवानंद से जुड़ा एक ऐसा ही दिलदार किस्सा सुनाया था। उन्होंने बताया कि लेबनान के बालबेक में खंडहरों के बीच एक गाने की शूटिंग चल रही थी। वहाँ जुटी विदेशियों की भीड़ ने अचानक चिल्लाना शुरू कर दिया, "शम्मी कपूर... शम्मी कपूर।" दरअसल, उस समय शम्मी कपूर की फिल्म 'जंगली' वहाँ सुपरहिट थी और भीड़ ने देवानंद को गलती से शम्मी कपूर समझ लिया था।

देवानंद का जवाब: कोई और एक्टर होता तो शायद नाराज हो जाता, मगर देवानंद ने मुस्कुराते हुए हाथ हिलाया और जोर से बोले, "हाँ... हाँ... हेलो! मैं शम्मी कपूर हूँ।"

बड़ा दिल: सायरा बानो ने कहा कि उस दिन उन्हें समझ आया कि देव साहब का दिल कितना बड़ा था। हर मुश्किल को स्टाइल में पार करना और दूसरों की भावनाओं का ध्यान रखना ही उनका स्वभाव था।

फैंस के लिए लंदन में करवाया गुपचुप ऑपरेशन

देवानंद का दिल सिर्फ बड़ा ही नहीं, बल्कि फैंस के लिए बेहद नाजुक भी था। अपनी बायोपिक 'रोमांसिंग विद लाइफ' में उन्होंने खुद लिखा कि एक छोटी-सी बीमारी के लिए उन्होंने लंदन जाकर गुपचुप ऑपरेशन करवाया। वजह: किसी को कानो-कान खबर नहीं होने दी, क्योंकि उनके फैंस उन्हें कभी कमजोर या बीमार नहीं देख सकते थे। फैंस के प्रति उनका यह समर्पण अद्भुत था।

अफसरों के प्रेम-पत्र पढ़कर मिली 'रोमांस' की स्क्रिप्ट

फिल्मों में कदम रखने से पहले, पंजाब के गुरदासपुर में पैदा हुए देवानंद बॉम्बे के एक ऑफिस में काम करते थे। वहाँ उनका काम ऑफिसरों के प्रेम-पत्र पढ़ना था। उन्होंने बताया कि पत्नियों और प्रेमिकाओं को लिखे उन खतों में इतना रोमांस था कि उनकी सारी स्क्रिप्ट्स वहीं से तैयार होने लगीं।

नौकरी छोड़ने का किस्सा: एक दिन एक पत्र में सिर्फ दो शब्द लिखे मिले "बस करो।" यही दो शब्द पढ़कर उन्होंने नौकरी छोड़ी और सिनेमा की दुनिया में कदम रखा, जहाँ उनकी लोकप्रियता मिसाल बन गई।

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