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अशोक कुमार के पिता उन्हें वकील बनाना चाहते थे, लेकिन किस्मत ने उन्हें बॉलीवुड का दिग्गज एक्टर बना दिया।
बॉम्बे टॉकीज में लैब की नौकरी करने वाले अशोक कुमार को फिल्म ‘जीवन नैया’ से अचानक हीरो बनने का मौका मिला।
साल 1943 में आई फिल्म ‘किस्मत’ ने अशोक कुमार को बड़ी पहचान दिलाई और उन्हें फिल्म इंडस्ट्री के सुपरस्टार्स में शामिल कर दिया।
Ashok Kumar Bollywood Career: हिंदी सिनेमा के इतिहास में जब भी उन कलाकारों का जिक्र होता है जिन्होंने बड़े पर्दे पर अपनी अमिट छाप छोड़ी, तो अशोक कुमार का नाम बेहद आदर के साथ लिया जाता है। उन्हें प्यार से सब दादामुनि कहकर बुलाते थे। उनका जन्म 13 अक्टूबर 1911 को बिहार के भागलपुर में हुआ था।
अशोक कुमार उन चुनिंदा कलाकारों में से थे जिन्होंने एक्टिंग की दुनिया में बिना किसी प्लामिंग के कदम रखा था और अपनी कला के दम पर दर्शकों के दिलों पर दशकों तक राज किया। उनकी जिंदगी से जुड़े कई ऐसे दिलचस्प किस्से और पड़ाव हैं जो आज भी लोगों को हैरान कर देते हैं।
अशोक कुमार के शुरुआती जीवन की कहानी बहुत सामान्य थी। उनके पिता कुंजीलाल एक फेमस वकील थे, इसलिए वह चाहते थे कि उनका बेटा भी कानून की पढ़ाई पूरी करे और उनके नक्शेकदम पर चलते हुए कोर्ट में प्रैक्टिस करे।
पिता की इस इच्छा का मान रखते हुए उन्होंने कानून की परीक्षा की तैयारी भी की और परीक्षा में बैठे भी, लेकिन वह उसमें सफल नहीं हो पाए। उनके मन में उस समय फिल्मों या एक्टिंग को लेकर दूर-दूर तक कोई विचार नहीं था, क्योंकि उस दौर में इस पेशे को बहुत अधिक सम्मान की नजरों से नहीं देखा जाता था।
साल 1936 में बॉम्बे टॉकीज में फिल्म जीवन नैया की शूटिंग चल रही थी। उस फिल्म के मुख्य एक्टर नजमुल हसन किसी विवाद के चलते अचानक फिल्म की मुख्य एक्ट्रेस के साथ स्टूडियो छोड़कर भाग गए। इस घटना से पूरी मेकिंग टीम संकट में आ गई।
तब स्टूडियो के कर्ताधर्ताओं की नजर लेबोरेटरी में काम कर रहे अशोक कुमार पर पड़ी और उन्हें जबरन कैमरे के सामने खड़ा कर दिया गया। जब उन्हें हीरो बनने का ऑफर मिला तो वह बुरी तरह घबरा गए, क्योंकि उन्होंने कभी एक्टिंग नहीं की थी। लेकिन स्टूडियो के मालिक के समझाने पर उन्होंने हामी भर दी और इस तरह उनका एक्सीडेंटल डेब्यू हुआ।
अशोक कुमार फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल रही और इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। साल 1943 में आई फिल्म किस्मत ने तो सफलता के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए, जिसमें उन्होंने एक एंटी-हीरो का रोल निभाया था। यह फिल्म उस दौर में एक करोड़ रुपये की कमाई करने वाली भारतीय सिनेमा की पहली फिल्म बनी थी।
एक्टिंग की दुनिया में कदम रखने पर जब उनके घर वालों को पता चला तो उनकी मां काफी रोई थीं, क्योंकि परिवार इसे अच्छा नहीं मानता था। हालांकि अपनी मेहनत और शानदार एक्टिंग के बल पर उन्होंने पद्मश्री, पद्म भूषण और दादा साहब फाल्के पुरस्कार जैसे सर्वोच्च सम्मान हासिल किए और हमेशा के लिए अमर हो गए।