Asha Bhosle Career: अपनी जादुई आवाज़ और बेमिसाल गायकी से 8 दशकों तक करोड़ों दिलों पर राज करने वाली महान गायिका आशा भोसले ने संगीत की हर विधा में अपनी अमिट छाप छोड़ी। इस महान कलाकार का जीवन संघर्ष, प्रतिभा और बेमिसाल सफलता की एक अद्भुत कहानी रहा है। आशा भोसले की जीवन यात्रा काफी कठिन मोड़ों से होकर गुजरी।
आशा भोसले के पिता दीनानाथ मंगेशकर एक जाने-माने गायक और एक्टर थे। जब आशा केवल 9 साल की थीं, तब उनके पिता का साया सिर से उठ गया था। इस मुश्किल के समय में परिवार को आर्थिक सहारा देने के लिए उन्होंने अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर के साथ मिलकर फिल्मों में गाना शुरू किया। महज 10 साल की उम्र में उन्होंने साल 1943 में एक मराठी फिल्म के लिए अपना पहला गीत रिकॉर्ड किया था। यहीं से उनके उस ऐतिहासिक सफर की शुरुआत हुई जिसने आगे चलकर इंडियन फिल्म इंडस्ट्री को नए मुकाम दिए।
आशा भोसले की सबसे बड़ी खासियत उनकी सिंगिग में लचीलापन था। उन्होंने सिर्फ हिंदी या मराठी तक खुद को सीमित नहीं रखा। आशा भोसले ने तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, गुजराती, बंगाली, असमिया और उड़िया सहित लगभग 20 भारतीय भाषाओं में गीत गाए। इसके अलावा उन्होंने रूसी और मलय जैसी विदेशी भाषाओं में भी अपनी आवाज़ का जादू चलाया। फिल्म संगीत से लेकर पॉप, ग़ज़ल, भजन, शास्त्रीय संगीत और कव्वाली तक, उन्होंने हर शैली को पूरी सहजता के साथ अपनाया और संगीत प्रेमियों को दीवाना कर दिया।
भारतीय सीमाओं को पार करते हुए आशा भोसले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश का नाम रोशन किया। साल 1977 में उस्ताद अली अकबर खान के साथ उनके एलबम 'लिगेसी' को फेमस ग्रैमी अवॉर्ड्स के लिए नामांकन मिला था।
इसके बाद साल 2005 में आरडी बर्मन के संगीत पर आधारित एलबम 'यू हैव स्टोलेन माई हार्ट' के लिए भी उन्हें दोबारा ग्रैमी में नामांकित किया गया। साल 2011 में सबसे ज्यादा गाने रिकॉर्ड करने के लिए उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ। उनके इस अभूतपूर्व योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री और पद्म भूषण अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया।