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अनुराधा पौडवाल ने आशिकी, साजन और दिल है कि मानता नहीं जैसी फिल्मों के गानों से खूब पॉपुलेरिटी हासिल की।
करियर के शिखर पर उन्होंने फिल्मी गानों से दूरी बनाने का फैसला किया।
अनुराधा पौडवाल ने भक्ति म्यूजिक में भी अपनी खास पहचान बनाई।
उनके करियर में फिल्मी गीतों से भजनों की ओर आया बदलाव एक अहम मोड़ साबित हुआ।
Anuradha Paudwal Bollywood Career: भारतीय म्यूजिक इंडस्ट्री में कुछ आवाजें ऐसी होती हैं जो सीधे दिल में उतर जाती हैं और लंबे समय तक अपनी छाप छोड़ जाती हैं। 90 के दशक के दौर में एक ऐसी ही जादुई आवाज ने पूरे देश को अपना दीवाना बना रखा था, जिसकी गूंज हर थियेटर्स और घर-घर में सुनाई देती थी।
आज जन्मदिन मना रहीं अनुराधा पौडवाल की जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। कर्नाटक के करवार जिले में जन्मी और मुंबई की गलियों में पली-बढ़ी इस सिंगर ने अपनी मेहनत के दम पर वो मुकाम हासिल किया, जहां पहुंचना हर किसी के बस की बात नहीं होती है। उनका सफर इस बात की मिसाल है कि अगर लगन सच्ची हो, तो बिना किसी पारंपरिक संगीत शिक्षा के भी इतिहास रचा जा सकता है।
आम तौर पर यह माना जाता है कि एक बेहतरीन सिंगर बनने के लिए सालों की शास्त्रीय म्यूजिक की तालीम जरूरी होती है। लेकिन अनुराधा पौडवाल ने इस सोच को पूरी तरह से गलत साबित कर दिखाया। उन्होंने म्यूजिक की कोई औपचारिक शिक्षा नहीं ली थी, बल्कि वह स्वर कोकिला लता मंगेशकर को अपना आदर्श मानती थीं।
अनुराधा पौडवाल के गानों को सुनकर रियाज करना उनकी रोज की आदत बन चुका था। उनका यह रियाज धीरे-धीरे इतना निखर गया कि संगीत प्रेमियों के बीच उनकी आवाज का जादू सिर चढ़कर बोलने लगा। एक दौर ऐसा भी आया जब फेमस संगीतकार ओपी नैयर ने यहां तक कह दिया था कि अब एक नए युग की शुरुआत हो चुकी है और इस सिंगर ने इंडस्ट्री में अपनी एक अलग ही जगह बना ली है।
किसी भी कलाकार की लाइफ में उसके अपनों का साथ बहुत मायने रखता है। अनुराधा पौडवाल का असली नाम अलका नंदकर्णी था, जिसे उन्होंने शादी के बाद बदल लिया था। उनके पति अरुण पौडवाल खुद फेमस संगीतकार एसडी बर्मन के साथी हुआ करते थे।
शादी के बाद उन्हें हिंदी सिनेमा में अपनी कला दिखाने का पहला बड़ा मौका मिला। उन्होंने अमिताभ बच्चन की फिल्म अभिमान के लिए एक खूबसूरत श्लोक गाकर अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद तो जैसे सफलता के द्वार खुल गए और हर बड़े बैनर की फिल्म में उनकी आवाज जरूरी सी हो गई।
90 का वह दौर अनुराधा पौडवाल के लिए स्वर्णिम काल साबित हुआ, जब उनकी मुलाकात कैसेट किंग के रूप में फेमस गुलशन कुमार से हुई। टी-सीरीज के साथ जुड़ने के बाद उनके करियर ने ऊंची उड़ान भरी।
फिल्म आशिकी, आमिर खान और पूजा भट्ट की फिल्म दिल है कि मानता नहीं और अनिल कपूर और माधुरी दीक्षित की फिल्म बेटा जैसी फिल्मों के लिए उन्हें लगातार 3 बार फेमस फिल्मफेयर अवॉर्ड से नवाजा गया। उस समय उनकी पॉपुलेरिटी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके गाए हुए गाने सीधे लोगों की जुबान पर चढ़ जाते थे और कैसेट बाजार में तहलका मचा देते थे।
सक्सेस की ऊंचाइंयों पर पहुंचने के बाद अनुराधा पौड़वाल ने केवल टी-सीरीज के लिए ही गाने का फैसला किया था। लेकिन इसके बाद उनकी जिंदगी में कुछ ऐसे दुखद मोड़ आए जिन्होंने सब कुछ बदल कर रख दिया।
पहले उनके पति का निधन हो गया और फिर म्यूजिक इंडस्ट्री के दिग्गज गुलशन कुमार की असमय हत्या ने उन्हें अंदर से तोड़ दिया। इन दो बड़े झटकों के बाद उन्होंने फिल्मी दुनिया की चकाचौंध से पूरी तरह मुंह मोड़ लिया और अपना पूरा जीवन भगवान की आराधना और भजन गाने के लिए समर्पित कर दिया।