Humayun Kabir Deal With BJP Video: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी माहौल अचानक गरमा गया है। विवाद के केंद्र में हैं हुमायूं कबरी, जो आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख हैं। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने एक वीडियो जारी कर बड़ा आरोप लगाया है कि कबीर भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर करोड़ों रुपये के सौदे में शामिल हैं और मुस्लिम वोटों को प्रभावित करने की साजिश रच रहे हैं। इस आरोप के बाद राज्य की राजनीति में तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है।
दरअसल, टीएमसी नेता फिरहाद हकीम, अरूप बिस्वास और कुणाल घोष ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक कथित वीडियो पेश किया। इस वीडियो में दावा किया गया कि हुमायूं कबीर किसी बातचीत में ‘1000 करोड़ रुपये’ और मुस्लिम समुदाय को गुमराह करने जैसी बातें कर रहे हैं।
कुणाल घोष ने यह भी आरोप लगाया कि इस कथित सौदे में प्रधानमंत्री ऑफिस (पीएमओ) तक की भूमिका हो सकती है और उन्होंने ईडी से जांच की मांग की। ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी का कहना है कि भाजपा, पश्चिम बंगाल में मुस्लिम वोटों को बांटने की रणनीति पर काम कर रही है।
हुमायूं कबीर ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जरिए बनाया गया है और पूरी तरह नकली है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि 2019 के बाद उनकी किसी भी भाजपा नेता से कोई मुलाकात या संपर्क नहीं हुआ है। कबीर ने चुनौती दी कि यदि टीएमसी के पास कोई ठोस सबूत है, तो उसे सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब उनकी छवि खराब करने के लिए एक सोची-समझी साजिश है।
हुमायूं कबीर ने सीधे ममता बनर्जी, अभीषेक बनर्जी, कुणाल घोष और फिरहाद हकीम पर निशाना साधा। उनका कहना है कि ये सभी नेता मिलकर उन्हें राजनीतिक रूप से कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब राजनीतिक मुकाबले में सीधे जीत संभव नहीं दिखती, तब इस तरह के एआई वीडियो का सहारा लिया जाता है।
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इस पूरे विवाद ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। एक तरफ टीएमसी इसे बड़ा घोटाला और साजिश बता रही है तो दूसरी ओर हुमायूं कबीर इसे फर्जी प्रचार करार दे रहे हैं। कबीर ने साफ किया है कि वह इस मामले को कोर्ट तक ले जाएंगे और मानहानि का मुकदमा दर्ज करेंगे। साथ ही उन्होंने मुस्लिम समुदाय से अपील की है कि वह इस तरह की खबरों से भ्रमित न हों। अब देखना होगा कि जांच एजेंसियां इस मामले में क्या रुख अपनाती हैं और चुनावी माहौल में यह मुद्दा कितना असर डालता है।