West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल में जैसे-जैसे वोटिंग की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे लोकतंत्र की पवित्रता को लेकर सवाल भी गहरे होते जा रहे हैं। मामला दक्षिण 24 परगना जिले के कस्बा विधानसभा क्षेत्र का है, जहां चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों को दरकिनार करने के गंभीर आरोप लगे हैं।
नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी का दावा है कि चुनाव ड्यूटी में नियमों की अनदेखी कर संविदा कर्मचारियों को लगाया गया है, जो सीधे तौर पर चुनाव की निष्पक्षता पर सवालिया निशान लगाता है।
बंगाल विधानसभा चुनाव में गड़बड़ी की आशंका जताते हुए सुवेंदु अधिकारी ने भारत निर्वाचन आयोग को एक लेटर लिखा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर बताया कि 149-कस्बा विधानसभा क्षेत्र में सेक्टर ऑफिसर और असिस्टेंट के पदों पर उन लोगों को बैठाया गया है जो सरकारी सेवा में स्थायी नहीं हैं। अधिकारी के अनुसार, जिला प्रशासन ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत इन संविदा कर्मियों की नियुक्ति की है ताकि लोकतांत्रिक ढांचे को प्रभावित किया जा सके। उन्होंने रिटर्निंग ऑफिसर पूर्णिमा डे की ओर से 10 अप्रैल 2026 को जारी किए गए उस आदेश (मेमो नंबर 93) का भी हवाला दिया है, जिसने इस पूरे विवाद को जन्म दिया है।
सुवेंदु अधिकारी ने उन कर्मचारियों की जड़ों को खंगाला है जिन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने खुलासा किया कि ये कर्मचारी पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत आईएसजीपीपी सेल में कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे हैं और फिलहाल जिला परिषद से संबद्ध हैं।
चुनाव आयोग के स्पष्ट निर्देश हैं कि ऐसी संवेदनशील ड्यूटी के लिए केवल स्थायी सरकारी अधिकारियों को ही नियुक्त किया जाना चाहिए ताकि वे किसी भी दबाव में न आएं और निष्पक्षता बनी रहे। अधिकारी का आरोप और भी गंभीर तब हो जाता है जब वे कहते हैं कि इन कर्मचारियों को पहले 'सेक्टर ऑफिसर' के रूप में चुना गया था, लेकिन जब इस पर सवाल उठे, तो प्रशासन ने खेल खेलते हुए उनके पदनाम बदलकर 'सेक्टर असिस्टेंट' कर दिए।
इस पूरे घटनाक्रम को सुवेंदु अधिकारी ने आदर्श आचार संहिता का खुला उल्लंघन करार दिया है। उनका तर्क है कि भले ही कागजों पर पदनाम बदल दिए गए हों, लेकिन उन कर्मचारियों की भूमिका और काम वही रखे गए हैं जो एक सेक्टर ऑफिसर के होते हैं।
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अधिकारी ने आयोग से मांग की है कि इस तरह की नियुक्तियों को तत्काल रद्द किया जाए क्योंकि यह स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकती हैं। उन्होंने संबंधित रिटर्निंग ऑफिसर के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की वकालत की है।