West Bengal Assembly Elections 2026: कोलकाता की चमक-धमक वाली गलियों से निकलकर टॉलीवुड की सिल्वर स्क्रीन और फिर देश की सबसे बड़ी पंचायत यानी संसद तक पहुंचने वाली नुसरत जहां का नाम आज किसी पहचान का मोहताज नहीं है। उनकी खूबसूरती और अदाकारी ने जहां दर्शकों का दिल जीता, वहीं उनकी राजनीतिक सूझबूझ ने उन्हें बशीरहाट की जनता का प्रतिनिधि बना दिया।
इस चकाचौंध के पीछे एक ऐसी कहानी भी है जो संघर्षों, कड़े फैसलों और कई विवादों से होकर गुजरती है। नुसरत का जीवन इस बात की मिसाल है कि कैसे एक कलाकार अपनी पहचान को राजनीति के साथ जोड़ सकता है, भले ही इसके लिए उन्हें भारी जनभावनाओं और आलोचनाओं का सामना क्यों न करना पड़े।
नुसरत जहां रूही का जन्म 8 जनवरी 1990 को कोलकाता के एक बंगाली मुस्लिम परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा और वाणिज्य स्नातक की पढ़ाई कोलकाता के प्रतिष्ठित कॉलेजों से पूरी की है। उनके करियर की शुरुआत साल 2010 में एक सौंदर्य प्रतियोगिता जीतकर हुई, जिसने उनके लिए अभिनय के द्वार खोल दिए। साल 2011 में फिल्म शत्रु के साथ उन्होंने बंगाली सिनेमा में अपना पहला कदम रखा, जिसमें उनके साथ मशहूर अभिनेता जीत नजर आए थे। इसके बाद उन्होंने खिलाड़ी, खोका 420 और जुलफि़कार जैसी कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया और खुद को एक सफल अभिनेत्री के रूप में स्थापित किया। उनकी लोकप्रियता का आलम यह था कि वे न केवल फिल्मों बल्कि हिट आइटम गानों के जरिए भी लोगों की पहली पसंद बन गईं।
साल 2019 नुसरत के जीवन में एक बड़ा मोड़ लेकर आया जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उन्हें बशीरहाट लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने का मौका दिया। पहली बार चुनावी मैदान में उतरीं नुसरत ने अपने प्रतिद्वंद्वी को साढ़े तीन लाख से भी अधिक वोटों के भारी अंतर से हराकर सबको चौंका दिया। राजनीति में प्रवेश करते ही वे संसद की सबसे कम उम्र की और सबसे चर्चित महिला सांसदों में शामिल हो गईं। सांसद के रूप में उन्होंने अपने क्षेत्र के बुनियादी ढांचे, सार्वजनिक सेवाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं पर काफी ध्यान केंद्रित किया। हालांकि वे अपनी फिल्मी दुनिया और राजनीतिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करती रहीं, लेकिन उनकी हर गतिविधि पर मीडिया की पैनी नजर बनी रही।
नुसरत जहां की निजी जिंदगी भी अक्सर उनकी राजनीतिक उपलब्धियों जितनी ही चर्चा का विषय रही है। साल 2019 में तुर्की में कारोबारी निखिल जैन के साथ उनकी शादी ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं, जिसे बाद में उन्होंने कानूनी रूप से अमान्य करार दिया था। इसके बाद अभिनेता यश दासगुप्ता के साथ उनके रिश्तों और उनके बेटे यीशान के जन्म ने भी काफी विवाद और चर्चा को जन्म दिया।
साल 2022 में उन्होंने आधिकारिक तौर पर यश दासगुप्ता के साथ अपनी शादी की पुष्टि की। इन तमाम विवादों और निजी उतार-चढ़ावों के बीच भी नुसरत ने अपनी सार्वजनिक छवि और राजनीतिक सक्रियता को कम नहीं होने दिया। साल 2026 तक वे अपनी राजनीतिक और सार्वजनिक भूमिकाओं में सक्रिय बनी हुई हैं।
सिनेमा के प्रति अपने जुनून को एक कदम आगे ले जाते हुए नुसरत ने साल 2023 में यश दासगुप्ता के साथ मिलकर 'वाईडी फिल्म्स' नाम से अपनी खुद की प्रोडक्शन कंपनी शुरू की। इसके बैनर तले वे अब फिल्मों का निर्माण भी कर रही हैं। साल 2025 में उनकी बांग्लादेशी फिल्म में विशेष उपस्थिति और आइटम गानों में उनकी वापसी ने प्रशंसकों को फिर से उत्साहित किया। पश्चिम बंगाल सरकार ने भी उनके कलात्मक योगदान को देखते हुए उन्हें प्रतिष्ठित 'महानयिका' पुरस्कार से सम्मानित किया है। आज नुसरत जहां एक ऐसी शख्सियत हैं जो अपनी शर्तों पर जीना जानती हैं और हर चुनौती का सामना मुस्कुराकर करती हैं।