देवव्रत सैकिया, फोटो- सोशल मीडिया 
विधानसभा चुनाव 2026

असम की सियासत का वो 'राजपुत्र' जिसने पिता की विरासत को दी नई ऊंचाई, देवव्रत सैकिया के संघर्ष की पूरी कहानी

Assam Elections 2026: असम की राजनीति में देवव्रत सैकिया एक ऐसा नाम हैं जिन्होंने पूर्व सीएम हितेश्वर सैकिया की विरासत को नई पहचान दी। जानिए नाजिरा से हैट्रिक विधायक और विपक्ष नेता के तौर पर उनका सफर।

प्रतीक पाण्डेय

Debabrata Saikia Biography: असम का नाम आते ही राजनीति के कई दिग्गज चेहरे आंखों के सामने आ जाते हैं, लेकिन एक नाम ऐसा है जिसने सत्ता के गलियारों से लेकर विपक्ष की कुर्सी तक अपनी एक अलग गरिमा बनाई है। हम बात कर रहे हैं देवव्रत सैकिया की, जिन्होंने अपने पिता, असम के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय हितेश्वर सैकिया के पदचिन्हों पर चलते हुए खुद को राज्य की सियासत का एक अहम स्तंभ साबित किया है।

14 दिसंबर 1964 को नाजिरा में जन्मे देवव्रत के लिए राजनीति कोई नया विषय नहीं था, बल्कि यह उनके खून में रची-बसी थी। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री ली और समाज की सेवा का संकल्प लेकर सार्वजनिक जीवन में कदम रखा।

विरासत के साये से निकल अपनी पहचान बनाने का सफर

किसी बड़े नेता का बेटा होना अक्सर एक दोधारी तलवार जैसा होता है, क्योंकि उम्मीदों का बोझ बहुत ज्यादा होता है और तुलना हर कदम पर की जाती है। देवव्रत सैकिया ने इस चुनौती को बड़ी ही परिपक्वता के साथ संभाला है। उनके पिता हितेश्वर सैकिया दो बार असम के मुख्यमंत्री रहे और मां हेमोप्रोवा सैकिया भी सरकार में वरिष्ठ मंत्री के पद पर आसीन रहीं। देवव्रत ने 1991 में युवा कांग्रेस के जरिए सक्रिय राजनीति में कदम रखा। उन्होंने सीधे बड़े पदों की चाह रखने के बजाय संगठन की सीढ़ियां चढ़ीं और 1990 के दशक में युवा कांग्रेस के महासचिव और उपाध्यक्ष के रूप में काम किया। साल 2011 में उन्होंने पहली बार नाज़िरा विधानसभा सीट से जीत दर्ज की, जो उनके परिवार का पारंपरिक गढ़ रहा है।

नाजिरा के अजेय योद्धा ने कैसे जीता जनता का दिल?

सैकिया के बारे में लोग बताते हैं कि नाजिरा की जनता के साथ उनका रिश्ता केवल एक विधायक और मतदाता का नहीं, बल्कि एक परिवार के सदस्य जैसा है। वे 2011 के बाद 2016 और 2021 में भी लगातार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। उनकी वित्तीय स्थिति और जीवनशैली की बात करें तो 2026 के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उनकी कुल नेट वर्थ लगभग 4.11 करोड़ रुपये है। लोगों की मानें तो वे ऐसे नेता हैं जिन्हें ग्रामीण इलाकों की यात्रा करना और स्थानीय लोक-संस्कृति के बीच वक्त बिताना बेहद पसंद है। उनकी पत्नी बंदना सैकिया व्यवसाय के क्षेत्र में सक्रिय हैं और उनके दो बच्चे, लुइत और कृष्णिका, उनके जीवन का सबसे मजबूत आधार हैं।

विपक्ष की बुलंद आवाज बनकर सत्ता को घेरा

साल 2016 देवव्रत के राजनीतिक जीवन का एक ऐतिहासिक पड़ाव साबित हुआ, जब उन्हें असम विधानसभा में विपक्ष का नेता चुना गया। उन्होंने जनहित के मुद्दों पर सरकार की नीतियों की आलोचना करने और जनता का पक्ष रखने में कभी कोई संकोच नहीं किया।

हालांकि, 2021 में कुछ राजनीतिक उथल-पुथल और विधायकों के इस्तीफे के कारण उन्हें तकनीकी रूप से इस संवैधानिक पद से कुछ समय के लिए हटना पड़ा था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और गुवाहाटी उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। न्यायालय ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और उन्हें फिर से विपक्ष के नेता के रूप में बहाल किया गया। यह घटना उनके अटूट हौसले और न्यायपालिका के प्रति उनके गहरे सम्मान को उजागर करती है।

देवव्रत सैकिया ने चराइदेव में बच्चों के लिए 'स्वर्ण जयंती चिल्ड्रन पार्क' की स्थापना की है, जहां मनोरंजन के साथ-साथ शिक्षा का भी खास प्रबंध किया गया है। इसके अलावा 'स्माइल प्रोजेक्ट' और 'जागरण' जैसी अभिनव पहलों के जरिए वे राज्य के दूर-दराज के लोगों की समस्याओं को सुनने और उनका समाधान खोजने का डिजिटल प्रयास कर रहे हैं।

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