Robert Vadra Delhi High Court Plea: कारोबारी राबर्ट वाड्रा ने सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट में अपनी वह याचिका वापस ले ली, जिसमें उन्होंने एक निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसने प्रवर्तन निदेशालय की शिकायत पर संज्ञान लिया था। यह मामला गुरुग्राम के शिकोहपुर गांव में 2008 की एक भूमि सौदे से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जुड़ा हुआ है। राबर्ट वाड्रा के वकील ने दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि याचिकाकर्ता वर्तमान याचिका को आगे बढ़ाने में रुचि नहीं रखते और इसे बिना शर्त वापस लेना चाहते हैं।
इस पर एकल न्यायाधीश पीठ के न्यायमूर्ति मनोज जैन ने याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी। न्यायमूर्ति जैन ने कहा, प्रारंभ में ही याचिकाकर्ता के वकील प्रतीक के. चड्ढा ने बताया कि याचिकाकर्ता याचिका को आगे नहीं बढ़ाना चाहते और इसे वापस लेना चाहते हैं। उन्होंने मामले का निपटारा करते हुए सभी पक्षों के अधिकार और दलीलों को खुला रखा।
पिछली सुनवाई में ईडी के वकील जोहेब हुसैन ने याचिका की स्वीकार्यता पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया था कि इसमें कानून को लेकर पूरी तरह गलत बयान दिए गए हैं। पिछले हफ्ते ही वाड्रा की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने यह दलील दी थी कि ईडी के पास PMLA के तहत कार्रवाई शुरू करने का अधिकार नहीं है, क्योंकि IPC और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कथित अपराध उस समय अनुसूचित अपराध नहीं थे।
ईडी ने इस दलील का विरोध करते हुए आरोप लगाया था कि याचिका में कानून को लेकर पूरी तरह गलत बयान दिए गए हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद वाड्रा को तत्काल राहत देने से इनकार करते हुए मामले को आगे की सुनवाई के लिए 18 मई तक स्थगित कर दिया था। बता दें, इस मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू की स्पेशल PMLA कोर्ट ने वाड्रा को जमानत दे दी है।
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राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश सुशांत चंगोत्रा ने 50,000 रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के एक जमानतदार पर राबर्ट वाड्रा को जमानत दे दी थी। अब मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी। यह मामला हरियाणा के शिकोहपुर गांव में 3.53 एकड़ जमीन की कथित लेन-देन में अनियमितताओं से जुड़ा है। ईडी के अनुसार, वाड्रा की कंपनी स्काइलाइट हास्पिटेलिटी प्राइवेट लिमिटेड ने फरवरी 2008 में ओमकारेश्वर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड से 7.50 करोड़ रुपये में जमीन खरीदी थी।