दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में जुटेगा क्षत्रिय समाज, UGC कानून और राजनीतिक हिस्सेदारी पर होगी बड़ी बैठक 
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दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में जुटेगा क्षत्रिय समाज, UGC कानून और राजनीतिक हिस्सेदारी पर होगी बड़ी बैठक

Kshatriya Mahasabha Meeting: अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक 7 अगस्त को दिल्ली में होगी। संगठन ने पीएम मोदी और मोहन भागवत को पत्र लिखकर यूजीसी कानून पर चिंता जताई है।

All India Kshatriya Mahasabha Delhi Meeting: अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की एक महत्वपूर्ण बैठक आगामी 7 अगस्त 2026, शुक्रवार को देश की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित होने जा रही है। यह बैठक रफी मार्ग स्थित प्रसिद्ध कांस्टीट्यूशन क्लब में दोपहर 12:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक चलेगी। राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व सांसद कुंवर हरिवंश सिंह की संस्तुति तथा महाराष्ट्र के पूर्व गृह राज्यमंत्री व राष्ट्रीय संरक्षक कृपा शंकर सिंह के मार्गदर्शन में इस कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई है।

यूजीसी कानून और भविष्य की चुनौतियों पर होगी चर्चा

कार्यक्रम प्रभारी राघवेन्द्र सिंह राजू ने बताया कि इस एक दिवसीय बैठक में हिस्सा लेने के लिए देशभर से संगठन के राष्ट्रीय पदाधिकारी, प्रदेश अध्यक्ष, विभिन्न प्रकोष्ठों के अध्यक्ष और युवा योद्धा दिल्ली पहुंच रहे हैं। इस बैठक का मुख्य एजेंडा नई यूजीसी (UGC) व्यवस्था को वापस (रोल बैक) लेने की मांग और समाज के भविष्य से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर साझा रणनीति तैयार करना है।

अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के सदस्य (सोर्स- सोशल मीडिया )

पीएम मोदी और मोहन भागवत को भेजा गया पत्र

बैठक से पहले संगठन ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत को एक विस्तृत ज्ञापन भेजा है। इस पत्र में राष्ट्र निर्माण में राजपूत समाज के ऐतिहासिक योगदान को याद दिलाते हुए वर्तमान समय की तीन बड़ी चिंताओं से अवगत कराया गया है। पत्र में लिखा गया है कि 8वीं से 17वीं शताब्दी तक देश को इस्लामी राष्ट्र बनने से बचाने में और आजादी के बाद अपनी रियासतें सौंपने में राजपूत समाज ने हमेशा सबसे आगे रहकर बलिदान दिया है।

घटते राजनीतिक प्रतिनिधित्व और शिक्षा नीति पर जताई चिंता

अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने अपने पत्र के जरिए तीन मुख्य मांगें उठाई हैं:--

  • यूजीसी कानून पर पुनर्विचार: नई यूजीसी व्यवस्था में योग्यता के बजाय श्रेणी को प्राथमिकता देने से मेधावी छात्रों का नुकसान होगा और संस्थागत पतन होगा, इसलिए इस पर दोबारा विचार किया जाए।
  • राजनीतिक हिस्सेदारी: 1952 और 1980 के मुकाबले आज सदन में राजपूत समाज का प्रतिनिधित्व लगातार घट रहा है। इसलिए केंद्रीय मंत्रिमंडल, राज्यसभा और विधान परिषदों में समाज को उचित भागीदारी मिले।
  • सामाजिक समरसता: सत्ता के स्वार्थ के कारण राष्ट्रवादी शक्तियों को कमजोर करने की कोशिश बंद हो और सभी राष्ट्रवादी संगठन एक मंच पर आएं।

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