बिहार के बाद अब दिल्ली में होगी SIR की प्रक्रिया 
दिल्ली

बिहार के बाद अब Delhi की बारी, वोटर लिस्ट में नाम है या नहीं? ECI ने जारी किए नए नियम

Bihar के बाद, ECI ने दिल्ली में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की तैयारी शुरू कर दी है । यह मतदाता सूचियों की सत्यता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए है सही तारीखों की घोषणा बाद में होगी।

सौरभ शर्मा

Special Intensive Revision in Delhi: बिहार के बाद अब दिल्ली में मतदाता सूची को अपडेट करने की एक बड़ी प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। चुनाव आयोग ने राष्ट्रीय राजधानी में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की तैयारी शुरू कर दी है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह से सटीक और गलती रहित बनाना है। इस अभियान की तारीखों की घोषणा जल्द ही की जाएगी, लेकिन दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय ने प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण निर्देश जारी कर दिए हैं, जिससे मतदाताओं के लिए नियमों को समझना आवश्यक हो गया है।

चुनाव आयोग की यह कवायद उसके संवैधानिक कर्तव्य का हिस्सा है, जिसके तहत मतदाता सूची की क्लीयरनेस और समग्रता सुनिश्चित की जाती है। इस प्रक्रिया के लिए सभी संबंधित अधिकारियों, जैसे जिला चुनाव अधिकारियों और बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में बीएलओ नियुक्त किए गए हैं, जो एसआईआर के दौरान घर-घर जाकर सर्वेक्षण करेंगे। दिल्ली सीईओ कार्यालय ने मतदाताओं की सुविधा के लिए 2002 की मतदाता सूची को ऑनलाइन भी उपलब्ध करा दिया है।

2002 की लिस्ट में नाम नहीं तो क्या करें?

इस पुनरीक्षण प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा 2002 की मतदाता सूची से मिलान करना है। जिन मतदाताओं के नाम 2002 और 2025 दोनों की मतदाता सूचियों में मौजूद हैं, उन्हें केवल गणना प्रपत्र के साथ 2002 की सूची का अंश जमा करना होगा। हालांकि, यदि किसी मतदाता का नाम 2002 की सूची में नहीं है, लेकिन उनके माता-पिता का नाम उस सूची में दर्ज है, तो उन्हें गणना प्रपत्र और माता-पिता के नाम वाले सूची के विवरण के साथ एक अतिरिक्त पहचान प्रमाण भी प्रस्तुत करना होगा।

बिहार में क्यों हुआ था इस पर विवाद?

दिल्ली से पहले यह प्रक्रिया बिहार में लागू की गई थी, जहां इसे लेकर काफी राजनीतिक बहस हुई। विपक्षी दलों सहित कई आलोचकों ने आरोप लगाया कि बिना पर्याप्त सत्यापन के कई वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए। इस प्रक्रिया के बाद बिहार में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या लगभग 7.9 करोड़ से घटकर 7.24 करोड़ हो गई थी। यह मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा, जिसने चेतावनी दी कि यदि प्रक्रिया में कोई अवैधता पाई गई तो वह इसे रद्द कर सकता है। न्यायालय ने बिहार एसआईआर में पहचान या निवास के प्रमाण के लिए आधार को एक वैध दस्तावेज के रूप में मानने का आदेश भी दिया था। इस मामले पर अंतिम बहस 7 अक्टूबर को होनी है।

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