Delhi Voter List SIR Starts June: दिल्ली में रहने वाले नागरिकों के लिए निर्वाचन आयोग ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) अशोक कुमार ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की तारीखों का एलान कर दिया है। इस प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची को अपडेट किया जाएगा ताकि आने वाले चुनावों के लिए एक पारदर्शी वोटर लिस्ट तैयार की जा सके।
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, मतदाता सूची के पुनरीक्षण की आधिकारिक शुरुआत 30 जून 2026 से होगी। हालांकि, इससे पहले जमीनी स्तर पर काम करने वाले बूथ लेवल अफसरों (BLO) की तैयारी शुरू हो जाएगी। बीएलओ को प्रशिक्षण देने का कार्य 20 जून से 29 जून के बीच संपन्न किया जाएगा। इसी अवधि में आंतरिक कार्य जैसे एनुमरेशन फॉर्म की छपाई और अन्य जरूरी दस्तावेजों का प्रबंधन पूरा कर लिया जाएगा।
इस बार निर्वाचन आयोग ने बड़े स्तर पर तैयारी की है। पूरी दिल्ली में सत्यापन कार्य को सुचारू रूप से चलाने के लिए 13,000 से अधिक बीएलओ की ड्यूटी लगाई गई है। ये अधिकारी हर घर का दौरा करेंगे और मतदाताओं की जानकारी का भौतिक सत्यापन करेंगे। आयोग ने स्पष्ट किया है कि पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए हर चरण में 'जांच और संतुलन' की व्यवस्था की गई है।
निर्वाचन अधिकारी अशोक कुमार के अनुसार, इस पुनरीक्षण प्रक्रिया में उन सभी नागरिकों को शामिल किया जाएगा जिनकी उम्र 1 अक्टूबर 2026 तक 18 साल या उससे अधिक हो जाएगी। मतदाताओं की सुविधा के लिए आयोग विशेष शिविर भी लगाएगा। सत्यापन के दौरान मतदाताओं को फॉर्म की दो प्रतियां दी जाएंगी, जिनमें से एक को भरकर बीएलओ को वापस करना होगा। आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देते हुए आयोग ने यह भी विकल्प दिया है कि मतदाता अपने भरे हुए फॉर्म ऑनलाइन भी जमा कर सकेंगे।
इस पूरी प्रक्रिया में राजनीतिक दलों को भी विश्वास में लिया गया है। बूथ स्तर के एजेंटों (BLAs) के माध्यम से राजनीतिक दल इस प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे। इसके अलावा, मतदाताओं को जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चलाए जाएंगे और सभी अपडेट मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर उपलब्ध रहेंगे।
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उल्लेखनीय है कि इस SIR की प्रक्रिया को लेकर कानूनी बहस भी देखने को मिली थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने SIR की प्रक्रिया को वैध और संवैधानिक करार दिया है, जिससे अब निर्वाचन आयोग के लिए इसे आगे बढ़ाने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।