Dharmendra Pradhan Resignation Protest: दिल्ली में आज सीजेपी और सरकार के बीच तीसरी और अहम बैठक होने वाली है। कॉकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधि सौरव दास और आशुतोष रांका और सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह बैठक में शामिल होने वाले है। आज की बैठक में यह साफ हो जाएगा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लिया जाएगा या नहीं। यदि आज इस्तीफे पर साफ जानकारी नहीं मिली तो सीजेपी बड़ा कदम उठा सकती है।
दिल्ली में आज सरकार के साथ होने वाली बैठक पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने बताया, "उन्होंने हमें आज दोपहर 3.30-4 बजे का समय दिया था। जगह अभी तय नहीं हुई है। बातचीत बिल्कुल साफ है। जिन दो मांगों पर सैद्धांतिक सहमति बनी है, उनके लिए हमें लिखित पुष्टि मिलनी चाहिए, ताकि उन्हें बंद किया जा सके।"
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आशुतोष रांका ने कहा, "हमें धर्मेंद्र प्रधान के मामले में हमे स्पष्टता चाहिए कि क्या वे उनका इस्तीफा मांगेंगे या नहीं। हमें 'हां' या 'ना' में जवाब चाहिए क्योंकि इस पर विचार-विमर्श की ज्यादा गुंजाइश नहीं है।"
इस बीच सोनम वांगचुक की आलोचनाओं को लेकर उन्होंने कहा, "इससे ज्यादा शर्मनाक कुछ नहीं हो सकता। एक व्यक्ति जिसने 26 दिनों तक भूख हड़ताल की और अपनी जान जोखिम में डाली, जिसने देश के भविष्य के लिए इतना कुछ किया, उसे दक्षिणपंथी (राइट विंग) लोग ट्रोल कर रहे हैं। इससे ज्यादा शर्मनाक कुछ नहीं हो सकता।"
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इस प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस ने सोनम वांगचुक को अन्ना पार्ट टू कहा और साथ निजी समझौते जैसे आरोपों पर भी उनका बयान सामने आया। सोनम वांगचुक के लिए कांग्रेस सांसद इमरान मसूद की "अन्ना पार्ट टू" और "सरकार के साथ निजी डील" वाली टिप्पणियों पर आशुतोष रांका ने कहा, "हमें नहीं पता कि कांग्रेस क्या सोच रही है। लेकिन उन्होंने बहुत कुछ किया है, उन्होंने बातचीत भी की है कि कोई कानूनी मामला नहीं होना चाहिए और उन्हें मुआवजा मिलना चाहिए। सोनम जी पर सवाल उठाना सही नहीं है।"
दिल्ली के जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' का विरोध-प्रदर्शन जारी रहने के कारण वहां सुरक्षा बढ़ा दी गई है। दिल्ली पुलिस ने इस जगह पर फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) टेक्नोलॉजी से लैस AI-पावर्ड मोबाइल सर्विलांस वैन तैनात की हैं।
अब देखना यह होगा कि क्या सरकार आज धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेकर आंदोलन खत्म करने में सहयोग करती है या फिर इस्तीफे की जगह कोई और विकल्प पेश करती है। हालांकि, एक बात तो साफ है कि अगर इस्तीफा नहीं होता है तो आंदोलन उग्र रूप ले सकता है।