जगदलपुर की रहने वाली शांति सेठिया की मां का कैंसर से निधन हो गया।
मां शासकीय महाविद्यालय में सहायक के पद पर कार्यरत थीं।
मां के निधन के बाद बेटी ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन दिया।
विभाग ने 45 वर्ष से अधिक उम्र होने के कारण आवेदन रद्द कर दिया।
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने विभाग के इस फैसले को सही ठहराया है।
Bilaspur High Court Writ Petition Dismissed : शांति सेठिया जगदलपुर की रहने वाली हैं। उनकी मां कॉलेज में सहायक थीं। मां का निधन कैंसर के कारण हुआ था। मां को भी अनुकंपा से नौकरी मिली थी।
शांति ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। विभाग ने उनका आवेदन खारिज कर दिया। खारिज करने की वजह उनकी अधिक उम्र थी। उनकी उम्र 45 वर्ष से अधिक हो चुकी है।इसके बाद शांति ने हाई कोर्ट का रुख किया।
मामले की सुनवाई बिलासपुर हाईकोर्ट में हुई। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ ने सुनवाई की। याचिकाकर्ता के वकील ने आर्थिक तंगी की दलील दी। उन्होंने बताया कि परिवार में कोई कमाने वाला नहीं है।
शांति अपने माता-पिता की इकलौती बेटी हैं। वकील ने 2007 के परिपत्र का हवाला दिया। उन्होंने उम्र सीमा में छूट देने की मांग की। हालांकि कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
राज्य सरकार ने अपनी नीति का हवाला दिया। सरकार ने 14 जून 2013 की नीति रखी। इस नीति के तहत अधिकतम उम्र 45 वर्ष है। शांति सेठिया इस उम्र सीमा को पार कर चुकी हैं। इसलिए उनका आवेदन नियमों के तहत खारिज हुआ। हाई कोर्ट ने सरकार के तर्क को सही माना। अदालत ने कहा कि नियमों का पालन जरूरी है। अधिकारियों के फैसले में कोई अवैधता नहीं है।
हाईकोर्ट ने 2007 के परिपत्र को स्पष्ट किया। उम्र में छूट का नियम केवल विधवा के लिए है। यह छूट मृत कर्मचारी की पत्नी को मिलती है। याचिकाकर्ता मृत कर्मचारी की बेटी हैं। इसलिए बेटी को यह लाभ नहीं मिल सकता। नियमों के तहत केवल विधवा ही पात्र है। कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया। इस तरह शांति सेठिया की उम्मीद टूट गई।