गोबरा नवापारा के ग्राम कुर्रा का मामला।
कुर्रा की 0.53 हेक्टेयर जमीन का मामला गरमाया।
2010 के राजस्व रिकॉर्ड खंगालने की जरूरत।
बिक्री से नामांतरण तक की प्रक्रिया जांच के घेरे में।
Kotwari land sold in Gobra Nawapara: गोबरा नवापारा के ग्राम कुर्रा की 0.53 हेक्टेयर जमीन को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है, यदि यह कोटवारी सेवा भूमि थी और इसके हस्तांतरण पर प्रतिबंध लागू था, तो जमीन की बिक्री कैसे हुई, रजिस्ट्री किस आधार पर हुई और नामांतरण किसके आदेश से दर्ज कर दिया गया। खसरा नंबर 941 (पुराना 641) से जुड़े इस मामले में वर्ष 2010 के राजस्व रिकॉर्ड अहम कड़ी माने जा रहे हैं।
उस समय पटवारी कन्हैया ध्रुव और आरआई डी.आर. साहू की पदस्थापना बताए जाने के बीच तत्कालीन खसरा-पंचशाला, नामांतरण प्रकरण, जांच प्रतिवेदन और आदेश-पत्रों की जांच जरूरी है। हालांकि, केवल पदस्थापना से किसी अधिकारी की जिम्मेदारी या अनियमितता साबित नहीं होती। मामले में मूल सवाल यह है कि जमीन की राजस्व स्थिति क्या थी, बिक्री के लिए सक्षम अनुमति जरूरी थी या नहीं, रजिस्ट्री के समय किन दस्तावेजों की जांच हुई और नामांतरण किस आदेश के आधार पर दर्ज किया गया। इन सवालों का जवाब मूल अभिलेख ही दे सकते हैं।
जानकारी के अनुसार, राजस्व विभाग ने 18 सितंबर 2026 को गोबरा नवापारा पुलिस को पत्र भेजकर कथित अनियमित हस्तांतरण पर कानूनी कार्रवाई का अनुरोध किया था। इसके बाद पुलिस ने 4 अक्टूबर 2026 को संबंधित राजस्व अधिकारी से स्पष्ट प्रतिवेदन और दस्तावेज मांगे जाने की बात कही। पुलिस की ओर से आवेदन में प्राथमिकी के लिए पर्याप्त विवरण नहीं होने का पक्ष सामने आया है।
संबंधित पत्रों की प्रमाणित प्रतियां मिलने पर ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी। विक्रेता नोखेलाल नगरची के कथित शपथपत्र और जमीन बेचने के कारणों को लेकर भी सवाल हैं। पारिवारिक विवाह और इलाज के खर्च का हवाला दिए जाने तथा कथित नोटरीकृत शपथपत्र के तहसील रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं होने की बात की दस्तावेजी पुष्टि जरूरी है।अब जांच के केंद्र में तीन सवाल हैं—कोटवारी भूमि की बिक्री कैसे हुई, रजिस्ट्री किन दस्तावेजों के आधार पर हुई और नामांतरण किस अधिकारी के आदेश से दर्ज किया गया? यदि नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो अभिलेखों के आधार पर जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जानी चाहिए।