खरीदी प्रक्रिया को लेकर भेजी गई लिखित शिकायत।
खेल एवं युवा कल्याण विभाग में खेल सामग्री खरीदी विवादों के घेरे में।
रायपुर को 2 करोड़ 89 लाख 74 हजार 940 रुपये का क्रय आदेश।
ट्रैक सूट की खरीदी 1800 रुपये प्रति नग बताई।
Bastar Surguja Olympic Sports Kit Controversy: छत्तीसगढ़ में बस्तर और सरगुजा ओलंपिक के आयोजन से पहले खेल एवं युवा कल्याण विभाग की करीब 2.90 करोड़ रुपये की खेल सामग्री खरीदी विवादों में घिर गई है। खरीदी प्रक्रिया को लेकर मुख्यमंत्री को 3 नवंबर को लिखित शिकायत भेजी गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि दूसरे राज्यों में उपलब्ध दरों की तुलना में छत्तीसगढ़ में कई गुना अधिक कीमत पर सामान खरीदा गया। इतना ही नहीं, करीब तीन करोड़ रुपये की सामग्री महज सात दिनों में सप्लाई कर भुगतान की प्रक्रिया शुरू करने पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं।
शिकायत के मुताबिक खेल विभाग ने 10 सितंबर को GEM पोर्टल पर टेंडर आमंत्रित किया था। इसके बाद 21 अक्टूबर की रात 10:30 बजे नेशनल प्रोडक्ट मार्ट, रायपुर को 2 करोड़ 89 लाख 74 हजार 940 रुपये का क्रय आदेश जारी किया गया। आरोप है कि खरीदी में प्रतिस्पर्धा और कीमतों के निर्धारण को लेकर गंभीर अनियमितताएं हुई हैं।
शिकायत में दिए गए तुलनात्मक आंकड़े चौंकाने वाले हैं। ट्रैक सूट की खरीदी छत्तीसगढ़ में 1800 रुपये प्रति नग की दर से बताई गई है, जबकि आगरा में 1100, उत्तर प्रदेश में 1200 और कांकेर आदिवासी विकास विभाग में 1000 रुपये की दर का उल्लेख है। स्पोर्ट्स टी-शर्ट 490 रुपये में खरीदी गई, जबकि दिल्ली में 200 और ओडिशा में 250 रुपये की दर बताई गई है।
इसी तरह स्पोर्ट्स शॉर्ट्स की कीमत 485 रुपये बताई गई, जबकि दिल्ली में इसकी दर 200 रुपये है। सबसे बड़ा सवाल स्पोर्ट्स फुटवियर पर है। शिकायत के अनुसार, यूनिस्टार कंपनी के जूते 1500 रुपये प्रति सेट की दर से खरीदे गए, जबकि Amazon, Flipkart और बाजार में इसी कंपनी के जूते 500 रुपये में उपलब्ध होने का दावा किया गया है। शिकायत में प्रस्तुत तुलनात्मक गणना के मुताबिक इन दरों के अंतर से सरकारी खजाने पर 1 करोड़ 47 लाख 87 हजार 500 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ने का दावा किया गया है।
मामले का दूसरा गंभीर पहलू सप्लाई और भुगतान की समयसीमा है। 21 अक्टूबर को क्रय आदेश जारी हुआ और 31 अक्टूबर को सामग्री सत्यापित कर GEM पोर्टल पर CRAC अपडेट करने के बाद उसी दिन शाम चार बजे भुगतान की प्रक्रिया शुरू होने का उल्लेख शिकायत में है। शिकायतकर्ता का सवाल है कि टेंडर की शर्तों के मुताबिक सैंपल जांच, लोगो और डिजाइन की मंजूरी, लैब टेस्ट, सामग्री की गिनती और भौतिक सत्यापन जैसी प्रक्रियाएं पूरी होनी थीं। ऐसे में इतने कम समय में इन सभी औपचारिकताओं का पूरा होना कैसे संभव हुआ?
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि जूते को Primary Product बनाया गया, जबकि ट्रैक सूट को प्राथमिक उत्पाद बनाया जाना चाहिए था। इसके अलावा टेंडर की समयसीमा दो बार बिना कारण बताए बढ़ाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। अब बड़ा सवाल यह है कि आदिवासी खिलाड़ियों के लिए खरीदी गई खेल सामग्री की कीमतों और गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच होगी या नहीं? क्या विभाग बताएगा कि खरीदी में तय दरों का आधार क्या था और सात दिनों में सप्लाई से लेकर भुगतान की प्रक्रिया कैसे पूरी हुई? शिकायत में मुख्यमंत्री के अलावा प्रधानमंत्री, राज्यपाल, खेल मंत्री, मुख्य सचिव और EOW-ACB को भी प्रतिलिपि भेजकर उच्चस्तरीय जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की गई है।