कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा में वर्ष 2023 में माओवादी गतिविधि की सूचना मिली थी।
सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम ने जंगलों में तलाशी अभियान शुरू किया था।
टीम ने घेराबंदी करके भाग रहे तीन संदिग्ध माओवादियों को मौके पर पकड़ा।
आरोपियों के पास से हथियार, नक्सली साहित्य और वाकी-टाकी बरामद हुई थी।
सुनवाई पूरी होने पर विशेष अदालत ने तीनों को 10-10 साल की सजा दी।
Kanker NIA Court Order Bhanupratappur Naxal Case : छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में एक बड़ा न्यायिक फैसला आया है। भानुप्रतापपुर की विशेष एनआईए (NIA) अदालत ने यह फैसला सुनाया है। कोर्ट ने वर्ष 2023 के एक मामले में तीन माओवादियों को दोषी माना है।
विशेष न्यायाधीश दीपक के. गुप्ता की अदालत ने यह निर्णय सुनाया है। तीनों दोषियों को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा मिली है। अदालत ने दोषियों पर 3,500-3,500 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इस तरह कुल 10,500 रुपये का अर्थदंड तय हुआ है।
घटना 18 मई 2023 की है। कोयलीबेड़ा थाना क्षेत्र के जंगलों में तलाशी अभियान चलाया गया था। सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम को माओवादियों की मौजूदगी का इनपुट मिला था।
चिलपरस और ढूंट्टा से निकली टीम केसोकोड़ी की तरफ बढ़ रही थी। तभी पहाड़ी के पास तीन संदिग्ध लोग दिखाई दिए। जवानों ने तुरंत घेराबंदी कर तीनों को पकड़ लिया।
पकड़े गए आरोपियों की पहचान पीलूराम आंचला, रमेश पुनेम और पुनऊ राम मंडावी के रूप में हुई। गिरफ्तारी के दौरान सुरक्षा बलों पर हमले का प्रयास भी हुआ था। इस दौरान एक जवान के हाथ में चोट आई थी।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कई खतरनाक सामग्रियां जब्त की थीं। इनमें वाकी-टाकी सेट, माओवादी चिट्ठियां और नक्सली साहित्य शामिल था। इसके अलावा नकदी, गुलेल, टॉर्च और चाकू भी बरामद हुए।
घटना के बाद कोयलीबेड़ा थाने में एफआईआर दर्ज की गई। मामला भारतीय दंड संहिता की धाराओं में दर्ज हुआ। साथ ही विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और यूएपीए की धाराएं लगाई गईं।
मामले की विस्तृत जांच तत्कालीन अंतागढ़ एसडीओपी अमर सिदार ने की। जांच पूरी होने के बाद अदालत में साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक टी.एस. यादव ने पैरवी की। सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने पीलूराम (35), रमेश (25) और पुनऊ (22) को सजा सुनाई। इस मामले का फैसला लगभग साढे तीन साल की कानूनी प्रक्रिया के बाद आया है।