अकलतरा में पचपेड़ी तालाब को पाटने का मुद्दा गरमाया।
मामला विधानसभा तक पहुंचा फिर भी नहीं हुई कार्रवाई।
राष्ट्रीय योजना से बने तालाब में करीब 500 ट्रक राखड़ डाली गई।
सरकारी योजना मनरेगा से लाखों रुपए खर्च हुए।
Pond Conservation issues in Chhattisgarh: अकलतरा जनपद की ग्राम पंचायत कल्याणपुर का पचपेड़ी तालाब आज जमीन के समतल टुकड़े में बदल चुका है। एक दशक पहले जिस तालाब पर सरकारी योजना मनरेगा से लाखों रुपए खर्च हुए उसकी जगह अब राखड़ से पटा सपाट मैदान दिखता है। मामला विधानसभा तक पहुंचा कार्रवाई के आदेश भी हुए लेकिन तालाब अब तक मूल स्वरूप में नहीं लौटा।
सरकारी दस्तावेज मनरेगा के एसेट रजिस्टर के अनुसार 2012 में स्वीकृत पचपेड़ी तालाब गहरीकरण एवं पचारी निर्माण का कार्य 4 फरवरी 2013 को शुरू हुआ। इस पर कुल 777901 रुपये खर्च हुए। इसमें 694 लोगों को काम मिला और 4,016 मानव-दिवस रोजगार के तहत काम हुआ।
12 मार्च 2026 को विधायक देवेन्द्र यादव के प्रश्न (क्र. 454) के उत्तर में उप मुख्यमंत्री (गृह) विजय शर्मा ने बताया कि तालाब बिना शासन की अनुमति के पाटा गया है। जनपद पंचायत की जांच में सरपंच लता लहरे और सचिव जलवती वैष्णव दोषी पाई गईं। एसडीएम (राजस्व) न्यायालय में धारा-40 के तहत प्रकरण दर्ज हुआ। सरपंच को 90 दिन में तालाब पूर्व स्वरूप में लाने और 7.779 लाख रुपये जनपद के खाते में जमा करने का आदेश है। सचिव की दो वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने की सजा 30 जून 2025 को दी गई।
राष्ट्रीय योजना से बने तालाब में करीब 500 ट्रक राखड़ डाली गई। पंचायत ने न ग्रामसभा की बैठक की न प्रस्ताव पारित किया। ग्रामीणों का आरोप है कि राखड़ डालने की अनुमति एक निजी पावर कंपनी को दी गई। आदेश की 90 दिन की समय-सीमा बीतने के बाद कई माह गुजर चुके हैं। पर बहाली का कोई प्रमाण नहीं मिला। कलेक्टर ने जनपद सीईओ को जांच के निर्देश दिए हैं। लेकिन जाँच अधिकारी ने क्या जाँच किया विभाग को पता ही नही चला।
ऐसे जलस्रोत भूजल पुनर्भरण और स्थानीय पर्यावरण संतुलन में अहम भूमिका निभाते हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जल्द कार्रवाई न हुई तो वे हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करेंगे। अब नजर इस पर है कि कलेक्टर के निर्देश पर होने वाली जांच तालाब की वर्तमान स्थिति और आदेश के पालन पर क्या तस्वीर पेश करती है।