Chhattisgarh High Court Contempt Petition : आबकारी विभाग के प्रधान निरीक्षक मुकेश शर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।प्रतियोगी परीक्षा के अंकों में गड़बड़ी को लेकर यह कानूनी लड़ाई शुरू हुई थी।
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के पक्ष में स्पष्ट आदेश पारित किया था। निर्धारित 90 दिनों की अवधि में इस आदेश का पालन नहीं किया गया। आदेश का अमल न होने पर आबकारी विभाग पर अवमानना याचिका दायर हुई।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में एक अहम मामले की सुनवाई हुई। यह मामला आबकारी विभाग से सीधे तौर पर जुड़ा है। विभाग के प्रधान निरीक्षक मुकेश शर्मा ने याचिका दाखिल की थी। प्रतियोगी परीक्षा के अंकों में कथित गड़बड़ी का आरोप था।
अदालत ने मुकेश शर्मा के पक्ष में फैसला सुनाया था। आदेश के बाद विभाग को कार्रवाई करनी थी। इसके लिए निर्धारित समय सीमा तय की गई थी। आदेश के बाद भी 90 दिन बीत गए। लेकिन विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
अदालत के आदेश का पालन समय पर नहीं हुआ। इससे व्यथित होकर याचिकाकर्ता ने फिर कोर्ट का रुख किया। उन्होंने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल कर दी।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। हाईकोर्ट ने आबकारी विभाग के अपर आयुक्त से सवाल किया। अदालत ने पूछा कि आपके खिलाफ अवमानना कार्रवाई क्यों न चले? अदालत का निर्देश न मानना गंभीर विषय माना गया है।
अब इस मामले में विभाग को जवाब दाखिल करना है। आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। यह मामला वरिष्ठ अधिकारी पीएस एलमा से भी जुड़ा है।
इस वजह से विभागीय स्तर पर काफी चर्चा हो रही है। अधिकारी अब अपना जवाब तैयार कर रहे हैं। हाईकोर्ट के सामने विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाएगी।
अदालत अब विभाग के जवाब का इंतजार कर रही है। जवाब देखने के बाद कोर्ट अगला कदम तय करेगा। अगर जवाब संतोषजनक नहीं हुआ तो कार्रवाई संभव है।
अदालत के आदेशों की अनदेखी भारी पड़ सकती है। इस मामले पर कानूनी जानकारों की भी नजर है। आने वाले दिनों में स्थिति पूरी तरह साफ हो जाएगी।