हाईकोर्ट ने फार्मेसी काउंसिल रजिस्ट्रार को पद से हटाने का आदेश दिया था।
तत्कालीन रजिस्ट्रार श्री अश्वनी गुरडेकर के पास निर्धारित योग्यता नहीं थी।
कोर्ट ने 8 सप्ताह में नए पूर्णकालिक रजिस्ट्रार की नियुक्ति का निर्देश दिया था।
समय पर आदेश का पालन न होने पर अवमानना याचिका दायर की गई।
हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव समेत 3 वरिष्ठ अधिकारियों से जवाब तलब किया है।
Chhattisgarh Pharmacy Council Registrar Appointment : छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। बिलासपुर स्थित मुख्य पीठ ने अवमानना याचिका पर सुनवाई की। मामला स्टेट फार्मेसी काउंसिल से जुड़ा हुआ है।
न्यायालय ने राज्य शासन के शीर्ष अधिकारियों को नोटिस भेजा है। इसमें स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। कोर्ट ने समय पर काम न होने पर नाराजगी जताई।
हाईकोर्ट ने 3 मार्च 2026 को एक अहम आदेश जारी किया था। उस आदेश में तत्कालीन रजिस्ट्रार को पद से हटाने को कहा गया। तत्कालीन रजिस्ट्रार श्री अश्वनी गुरडेकर के पास जरूरी योग्यता नहीं थी।
इसके बाद कोर्ट ने 15 मई 2026 को नया आदेश दिया। इसमें शासन को स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे। कोर्ट ने 8 सप्ताह में नए पूर्णकालिक रजिस्ट्रार की नियुक्ति करने को कहा।
न्यायालय द्वारा दी गई समय सीमा तय समय में समाप्त हो गई। इसके बावजूद फार्मेसी काउंसिल में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। कोर्ट के आदेश का पालन समय पर नहीं किया गया।
इस ढिलाई के बाद डॉ. राकेश गुप्ता ने कानूनी कदम उठाया। उन्होंने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर दी। याचिका में अधिकारियों की लापरवाही को सामने रखा गया।
26 अक्टूबर 2026 को माननीय उच्च न्यायालय ने इस याचिका पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मामले को काफी गंभीरता से लिया। अदालत ने सीधे जिम्मेदार अफसरों को नोटिस जारी किया।
नोटिस पाने वालों में स्वास्थ्य सचिव श्री अमित कटारिया शामिल हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य संचालक संजीव झा को भी नोटिस भेजा गया है। छत्तीसगढ़ स्टेट फार्मेसी काउंसिल के अध्यक्ष अरुण मिश्रा को भी नोटिस मिला है।
माननीय अदालत ने सभी अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अधिकारियों को तीन सप्ताह के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करना होगा। उन्हें कोर्ट के समक्ष स्थिति साफ करनी होगी।
अधिकारियों को यह बताना होगा कि आदेश का पालन क्यों नहीं हुआ। निर्धारित समय में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी क्यों नहीं की गई? यदि जवाब संतोषजनक नहीं रहा, तो अवमानना की कार्यवाही हो सकती है।
स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को अब लिखित स्पष्टीकरण देना होगा। उन्हें समय सीमा के भीतर जवाब दाखिल करना अनिवार्य है। इस मामले ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
अब सबकी नजरें अधिकारियों के आने वाले जवाब पर टिकी हैं। क्या विभाग जल्द नए पूर्णकालिक रजिस्ट्रार की नियुक्ति करेगा? इसका फैसला कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई पर निर्भर करेगा।