बिलासपुर सीताराम मंदिर फोटो सोर्स- नवभारत
बिलासपुर

साल में सिर्फ दशहरे के दिन खुलता है बिलासपुर का यह चमत्कारी मंदिर, वजह कर देगी हैरान

Bilaspur Sitaram Temple Dussehra : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक ऐसा अनोखा मंदिर है जिसके पट साल में सिर्फ दशहरे के दिन खुलते हैं। यहां भगवान के दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।

घनश्याम गंधर्व, ऐश्वर्या द्विवेदी

Dussehra Bilaspur Sitaram Hanuman Temple Darshan : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में एक बेहद अनोखा और प्राचीन मंदिर स्थित है। इस मंदिर के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को पूरे साल भर का लंबा इंतजार करना पड़ता है। जूना बिलासपुर के हटरी चौक पर स्थित सीताराम हनुमान मंदिर अपने नियमों के कारण बहुत प्रसिद्ध है। इस मंदिर के पट साल में सिर्फ एक बार विजयादशमी यानी दशहरे के दिन ही खोले जाते हैं। मंदिर के कपाट खुलते ही यहां भक्तों की भारी भीड़ जुट जाती है।

सुबह से लगती है भक्तों की लंबी कतार

दशहरे के दिन इस मंदिर के पट सुबह ठीक सात बजे खोले जाते हैं। इसके बाद श्रद्धालु भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी के दर्शन करते हैं। मंदिर में दर्शन करने का समय सुबह सात बजे से शाम चार बजे तक तय किया गया है। कोई अपनी मुराद लेकर पहुंचता है तो कोई पुरानी परंपरा निभाने आता है। इस बार भी दशहरे के पावन अवसर पर सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा।

नीम के पेड़ से प्रकट हुई थीं प्रतिमाएं

स्थानीय लोगों की मान्यताओं के अनुसार यह सीताराम हनुमान मंदिर करीब 160 साल पुराना है। बताया जाता है कि इस स्थान पर पहले एक बहुत बड़ा नीम का पेड़ हुआ करता था। समय बीतने के साथ वह पेड़ सूखकर गिर गया था। उस पेड़ की जड़ों से भगवान श्रीराम और हनुमान जी की प्रतिमाएं प्रकट हुई थीं। बाद में इन सभी प्रतिमाओं को वहीं स्थापित कर दिया गया और मंदिर का निर्माण हुआ। तब से लेकर आज तक पांडेय परिवार ही इस मंदिर का संचालन करता आ रहा है।

मनोकामना पूर्ति का प्रमुख केंद्र

भक्तों के बीच ऐसी गहरी मान्यता है कि दशहरे पर यहां दर्शन करने से हर मनोकामना पूरी होती है। इसी वजह से दूर-दूर से लोग अपनी फैमिली के साथ यहां आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। श्रद्धालु वंदना यादव ने बताया कि उन्होंने इस मंदिर के बारे में काफी कुछ सुना था। इस बार उन्हें पहली बार यहां आकर भगवान के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। दर्शन करने के बाद उनके मन को बहुत शांति मिली।

सोशल मीडिया रील्स का असर

आज के समय में सोशल मीडिया किसी भी जानकारी को पल भर में वायरल कर देता है। इस अनोखे मंदिर की चर्चा भी अब सोशल मीडिया रील्स पर खूब हो रही है। श्रद्धालु रूपेंद्र यादव ने बताया कि उन्होंने एक रील में इस मंदिर के बारे में देखा था। उन्हें जब पता चला कि मंदिर साल में केवल एक दिन खुलता है तो वह खुद को रोक नहीं पाए। विनोद कुमार देवांग ने भी कहा कि लोगों की इस जगह पर अटूट आस्था है।

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