बिलासपुर हाईकोर्ट (सोर्स: सोशल मीडिया)
बिलासपुर

13 साल अलग रहने के बाद भी नहीं मिला तलाक! बिलासपुर हाईकोर्ट ने पति की अपील की खारिज, जानिए वजह

Bilaspur High Court Verdict: बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक वैवाहिक विवाद में साफ कर दिया कि लंबे समय तक अलग रहना अपने आप में तलाक का पर्याप्त कानूनी आधार नहीं है। साथ ही पति की अपील का खारिज कर दिया है।

घनश्याम गंधर्व, चंदू निर्मलकर

Highlights

  • वैवाहिक विवाद में बिलासपुर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला।

  • राजनांदगांव निवासी रोहित रजक की अपील खारिज।

  • 18 जून 1998 को भिलाई के रिसाली में हुई थी शादी।

  • आरोपों के आधार पर पति ने की थी तलाक की मांग।

Bilaspur High Court Verdict in Matrimonial Dispute: शादी के कई साल बाद पति-पत्नी अलग रहने लगें, तो क्या सिर्फ इसी आधार पर तलाक मिल सकता है? छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक वैवाहिक विवाद में साफ कर दिया कि लंबे समय तक अलग रहना अपने आप में तलाक का पर्याप्त कानूनी आधार नहीं है। पति को क्रूरता या परित्याग जैसे आधारों को ठोस साक्ष्यों के जरिए साबित करना होगा। न्यायमूर्ति पार्थ प्रीतम साहू और न्यायमूर्ति सुषमा सावंत की खंडपीठ ने राजनांदगांव निवासी रोहित रजक की अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने पारिवारिक न्यायालय के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें पति की तलाक की मांग स्वीकार नहीं की गई थी।

पत्नी पर लगाए आरोप, कोर्ट में नहीं टिके दावे

मामले के अनुसार, रोहित रजक और संतोषी रजक की शादी 18 जून 1998 को भिलाई के रिसाली में हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी। पति ने आरोप लगाया कि पत्नी सरकारी आवास छोड़कर मायके चली गई और अपने साथ नकदी, गहने तथा जमीन के दो भूखंडों के दस्तावेज ले गई। उसने यह भी दावा किया कि पत्नी दूसरी शादी करने के झूठे आरोप लगाकर उसे मानसिक रूप से परेशान करती थी। इन्हीं आरोपों के आधार पर पति ने तलाक की मांग की थी। हालांकि, पत्नी ने इन दावों को खारिज करते हुए पति पर ही प्रताड़ना के आरोप लगाए।

पत्नी का पलटवार, बोली- बांझ कहकर घर से निकाला

पत्नी ने अदालत में कहा कि पति उसे बांझ कहकर प्रताड़ित करता था और घर से निकाल दिया था। उसने यह भी आरोप लगाया कि पति दूसरी महिला से शादी करने की बात कह चुका था। पत्नी के मुताबिक, भरण-पोषण की जिम्मेदारी से बचने के लिए पति ने तलाक का मुकदमा दायर किया था।

कोर्ट ने पूछे सवाल, पति के पास नहीं मिले ठोस जवाब

हाई कोर्ट ने मामले में पेश साक्ष्यों और पति के बयानों की समीक्षा की। कोर्ट ने पाया कि पति ने स्वीकार किया था कि शादी के शुरुआती 10 से 12 वर्षों तक दोनों के बीच कोई विवाद नहीं था। वह यह भी स्पष्ट नहीं कर सका कि पत्नी आखिर किन परिस्थितियों में मायके चली गई थी।

रिकॉर्ड में ऐसे पर्याप्त साक्ष्य भी नहीं मिले, जिनसे साबित हो सके कि पति ने पत्नी को वापस लाने के लिए लगातार और गंभीर प्रयास किए थे। नकदी और गहने ले जाने के आरोपों को भी उसके बयान से पर्याप्त समर्थन नहीं मिला। इसके अलावा, मानसिक प्रताड़ना के आरोपों के समर्थन में पति ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सका। वह यह भी स्पष्ट नहीं कर पाया कि कथित शिकायतें उसने किन लोगों के सामने की थीं।

हाईकोर्ट का स्पष्ट संदेश: अलगाव भर से नहीं टूटेगा विवाह

खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि लंबे समय तक अलग रहने या वैवाहिक संबंध टूट जाने की दलील मात्र से तलाक नहीं दिया जा सकता। संबंधित कानूनी आधारों को साक्ष्यों के जरिए साबित करना जरूरी है। अदालत ने माना कि पति क्रूरता और परित्याग के आधारों को प्रमाणित करने में विफल रहा। इसी वजह से उसकी अपील खारिज कर दी गई और पारिवारिक न्यायालय का फैसला बरकरार रहा।

CJP Protest LIVE: अभिजीत दिपके को मिली जमानत, रिहा होने के बाद आई पहली प्रतिक्रिया

Kal Ka Mausam: तमिलनाडु से केरल तक बारिश का अलर्ट, दिल्ली-UP में कैसा रहेगा मौसम? पढ़ें IMD का ताजा अपडेट

कांग्रेस ने बुक किया रामलीला मैदान, बड़े आंदोलन की तैयारी; दिल्ली पुलिस से भी मिली परमिशन

CJP चीफ अभिजीत दिपके को SEM कोर्ट से मिली जमानत, अब किन शर्तों का करना होगा पालन?

सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी: इंटरनेट का प्रयोग सभी का मौलिक अधिकार, इसमें बच्चे भी शामिल