Shubhangi Mishra Success Story: मध्य प्रदेश की 21 वर्षीय शुभांगी मिश्रा की सफलता की कहानी उन युवाओं के लिए मिसाल है, जो किसी परीक्षा में असफल होने के बाद अपना हौसला खो देते हैं। डॉक्टर बनने का सपना लेकर शुभांगी ने NEET की तैयारी की और दो बार परीक्षा दी। पहले प्रयास में उन्हें 400 और दूसरे प्रयास में 570 अंक मिले, लेकिन MBBS की सीट नहीं मिल सकी। इसके बाद उन्होंने लक्ष्य बदला और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी।
बिना किसी महंगी कोचिंग के घर पर रहकर YouTube, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और सेल्फ स्टडी के जरिए रोजाना 8 से 10 घंटे पढ़ाई की। उनकी मेहनत का नतीजा यह रहा कि महज 21 साल की उम्र में उन्होंने पांच सरकारी नौकरियां हासिल कर लीं। फिलहाल वह शहडोल पुलिस लाइन में कांस्टेबल के पद पर सेवाएं दे रही हैं। जानिए शुभांगि के सफलता की पूरी जानकारी।
5 सरकारी नौकरियों में एक साथ चयन और वर्तमान में कांस्टेबल शुभांगी मिश्रा मध्य प्रदेश केउमरिया जिले के शाहपुर जिले की रहने वाली हैं। उनके पिता श्याम कुमार मिश्रा भी वर्तमान में मध्य प्रदेश पुलिस में हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात हैं,
और शहडोल आईजी कार्यालय में अपनी सेवाऐ दे रहें हैं। अपनी बेटी के एक साथ 5 सरकारी नौकरियों में चयन होने के बाद उनके खुशी का ठिकाना नहीं है। पिता श्याम कुमार ने बताया कि यही बेटियों को शुरुआत से ही पढ़ने लिखने का अवसर दिया जाए तो, उन्हें सफलता पाने में कोई नहीं रोक सकता है।
शुभांगी मिश्रा ने 8 जून 2026 को मध्य प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल के पद पर जॉइन किया है। उन्होंने बताया कि वह बिना किसी महंगे कोचिंग सेंटर की सहायता से इन 5 प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त की है।
शुभांगी मिश्रा ने कहा की मध्य प्रदेश पुलिस कांस्टेबल के आलावा भी उनका चयन 4 अन्य पदों पर हुआ था। जिनमें एसएससी स्टेनोग्राफर एमपी पुलिस सब-इंस्पेक्टर (Sub-Inspector), सहायक उपनिरीक्षक (ASI-स्टेनो) और सूबेदार के पद शामिल है।
12वीं के बाद डॉक्टर बनने का सपना लेकर उन्होंने NEET की तैयारी शुरू की और परीक्षा भी दी। पहले प्रयास में उन्हें 400 अंक मिले, जबकि दूसरे प्रयास में उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर 570 अंक हासिल किए।
इसके बावजूद कटऑफ के कारण उन्हें MBBS में दाखिला नहीं मिल सका। यह उनके लिए निश्चित तौर पर निराशाजनक दौर था, लेकिन उन्होंने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने डॉक्टर बनने के सपने को पीछे छोड़ते हुए एमपी पुलिस कांस्टेबल बनने का लक्ष्य तय किया।
इसके बाद उन्होंने घर पर रहकर YouTube के जरिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की। उन्हें खुद पर पूरा भरोसा था और उन्होंने हर परीक्षा में अपनी पूरी मेहनत और क्षमता लगा दी। उनकी मेहनत का नतीजा भी शानदार रहा। उन्होंने एक के बाद एक कई प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की और आखिरकार एक साथ पांच सरकारी परीक्षाएं क्रैक कर अपने सपनों को नई दिशा दी।
शुभांगी ने लक्ष्य बदलने के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में पूरी तरह खुद को झोंक दिया। वह रोजाना 8 से 10 घंटे सेल्फ स्टडी करती थीं। पढ़ाई के लिए उन्होंने किसी बड़े कोचिंग संस्थान पर निर्भर रहने के बजाय YouTube,
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और सेल्फ स्टडी को अपना सबसे बड़ा सहारा बनाया। उनका मानना है कि मेहनत और खुद पर भरोसा हो तो मुश्किल से मुश्किल लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है।
शुभांगी कहती हैं, “असफलता कभी अंत नहीं होती, बल्कि यह नई शुरुआत का अवसर होती है।” बचपन से ही उनका सपना सिविल सेवा में जाने का था। उनका मानना है कि UPSC की तैयारी शुरू करने से पहले अगर कोई नौकरी हासिल हो जाए तो आर्थिक और मानसिक रूप से तैयारी करना आसान हो जाता है।
इसी सोच के साथ उन्होंने पहले सरकारी नौकरियों के लिए प्रयास किया और सफलता हासिल की। अब उनका अगला लक्ष्य UPSC या राज्य PCS परीक्षा पास कर कुशल सिविल सेवक बनना है। इसके लिए वह लगातार मेहनत और तैयारी कर रही हैं।