एनसीईआरटी (फोटो- सोशल मीडिया) 
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न्यायपालिका में करप्शन वाले चैप्टर पर NCERT ने मांगी माफी, लोगों से किताब लौटाने की अपील

NCERT ने कक्षा आठवीं की सामाजिक विज्ञान की किताब में न्यायपालिका पर विवादित अध्याय के लिए माफी मांगी है. एनसीईआरटी की कक्षा 8 की पाठ्यपुस्तक 'समाज की खोज' का विवादित चैप्टर वापस ले लिया गया है।

अर्पित शुक्ला

NCERT News: एनसीईआरटी ने कक्षा आठवीं की किताब में शामिल विवादित अध्याय ‘न्यायपालिका में करप्शन’ के लिए माफी मांग ली है। इस किताब को अब मार्केट से हटा भी दिया गया है। एनसीईआरटी ने एक पोस्ट में लिखा, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने हाल ही में सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक ‘समाज की खोज: भारत और उससे परे,’ कक्षा 8 (भाग II) प्रकाशित की थी, जिसमें चैप्टर IV ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ शामिल था। एनसीईआरटी के निदेशक और सदस्य इस चैप्टर के लिए बिना शर्त माफी मांगते हैं। पूरी पुस्तक वापस ले ली गई है और अब यह मार्केट में उपलब्ध नहीं है।

एनसीईआरटी की आठवीं कक्षा की इस पाठ्यपुस्तक में शामिल ‘न्यायिक भ्रष्टाचार’ अध्याय विवादों के केंद्र में रहा। सुप्रीम कोर्ट ने इसे ‘आपत्तिजनक’ सामग्री बताते हुए पुस्तक पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया। इसके बाद एनसीईआरटी ने शुक्रवार को एक एडवाइजरी जारी की, जिसमें कहा गया कि जिनके पास इस अध्याय वाली पाठ्यपुस्तकें हैं, वे उन्हें जल्द से जल्द लौटाएं।

सोशल मीडिया से विवादित सामाग्री हटाने का निर्देश

एडवाइजरी में यह भी कहा गया कि सोशल मीडिया पर इस विवादास्पद अध्याय से जुड़ी कोई भी सामग्री तुरंत हटाई जाए। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को पत्र लिखकर एनसीईआरटी की इस विवादित पुस्तक का डिजिटल प्लेटफॉर्म और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिए प्रसार रोकने के निर्देश दिए थे।

सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी रोक

एनसीईआरटी ने एडवाइजरी में स्पष्ट किया, "जिस किसी व्यक्ति या संगठन के पास ‘एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ पाठ्यपुस्तक है, वह इसे एनसीईआरटी मुख्यालय में लौटा सकता है। ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ अध्याय से जुड़ी किसी भी सामग्री को सोशल मीडिया या डिजिटल प्लेटफॉर्म से तुरंत हटाया जाना चाहिए।" इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एनसीईआरटी की आठवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की किताब के भविष्य में किसी भी प्रकाशन, पुनर्मुद्रण या डिजिटल प्रसार पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था।

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