सोने-चांदी की कीमतों पर बजट का असर, (डिजाइन फोटो/नवभारत लाइव) 
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Budget 2026: बजट के बाद सस्ता होगा सोना या आसमान छुएंगे चांदी के दाम? वित्त मंत्री के पिटारे में क्या खास?

Budget 2026: भारत अपनी सोने की खपत का एक बड़ा हिस्सा दुनिया के अन्य देशों से आयात करता है। इसलिए, बजट में इम्पोर्ट ड्यूटी में किया गया कोई भी बदलाव सीधे तौर पर घरेलू कीमतों को प्रभावित करता है।

मनोज आर्या

Gold And Silver In Budget 2026: आगामी 1 फरवरी 2026 को पेश होने वाले बजट को लेकर आम जनता से लेकर निवेशकों तक की निगाहें वित्त मंत्री के 'बजट पिटारे' पर टिकी हैं। विशेष रूप से सोने और चांदी की कीमतों को लेकर अटकलें तेज हैं। पिछले कुछ महीनों में वैश्विक अस्थिरता और हालिया ETF क्रैश के बाद यह सवाल बेहद अहम हो गया है कि बजट के बाद सोना सस्ता होगा या इसकी कीमतों में और उछाल आएगा।

भारत अपनी सोने की खपत का एक बड़ा हिस्सा दुनिया के अन्य देशों से आयात करता है। इसलिए, बजट में इम्पोर्ट ड्यूटी (Import Duty) में किया गया कोई भी बदलाव सीधे तौर पर घरेलू कीमतों को प्रभावित करता है। अगर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ती है तो भारतीय बाजारों में सोना-चांदी महंगा होगा।

बजट में इंपोर्ट ड्यूटी कटौती की संभावना

सर्राफा बाजार के जानकारों और ज्वेलर्स एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि सोने पर आयात शुल्क को और कम किया जाए। यदि सरकार ड्यूटी में कटौती करती है, तो सोने और चांदी की कीमतों में 2,000 रुपये से 4,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक की तत्काल गिरावट देखी जा सकती है। वहीं, ड्यूटी कम होने से सोने की आधिकारिक आवक बढ़ती है और तस्करी कम होती है, जिससे बाजार में पारदर्शिता आती है और कीमतें स्थिर रहती हैं।

वैश्विक परिस्थितियां और 'ट्रंप फैक्टर'

2026 की शुरुआत से ही वैश्विक राजनीति में बड़े बदलाव आए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा टैरिफ नीतियों में नरमी के संकेत और नाटो देशों के साथ रणनीतिक समझौतों ने डॉलर को मजबूत किया है। आमतौर पर जब डॉलर मजबूत होता है, तो सोने की कीमतों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव देखा जाता है। यदि बजट के आसपास डॉलर इंडेक्स (Dollar Index) अपनी बढ़त बरकरार रखता है, तो भारतीय बाजार में भी सोना बहुत ज्यादा महंगा होने की संभावना कम है।

सस्ता होगा या महंगा? दो संभावित परिदृश्य

परिदृश्य 1: यदि बजट में रियायतें मिलीं (कीमतें गिरेंगी)

अगर वित्त मंत्री 'मिडिल क्लास' को राहत देने के उद्देश्य से फिजिकल गोल्ड और Sovereign Gold Bonds (SGB) के नियमों में ढील देती हैं या कैपिटल गेन टैक्स (Capital Gain Tax) की अवधि में बदलाव करती हैं, तो निवेशकों का रुझान बढ़ेगा। साथ ही, ड्यूटी कटौती से कीमतें ₹70,000 - ₹72,000 के दायरे में आ सकती हैं।

परिदृश्य 2: यदि ड्यूटी में बदलाव नहीं हुआ (कीमतें स्थिर या बढ़ेंगी)

यदि सरकार चालू खाता घाटे (CAD) को नियंत्रित करने के लिए ड्यूटी यथावत रखती है, तो घरेलू मांग (शादियों का सीजन) के चलते कीमतें फिर से ₹78,000 - ₹80,000 के स्तर को छू सकती हैं। चांदी के मामले में, औद्योगिक मांग (Industrial Demand) बढ़ने के कारण इसके ₹95,000 प्रति किलो के पार जाने के आसार हैं।

सिल्वर ETF क्रैश और बजट का संबंध

हाल ही में 22 जनवरी को गोल्ड और सिल्वर ETFs में जो 12-21% की गिरावट आई है, वह इस बात का संकेत है कि बाजार पहले से ही बजट और वैश्विक संकेतों को 'डिस्काउंट' कर रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह गिरावट बजट से पहले की 'प्रॉफिट बुकिंग' है, जिससे बजट के बाद बड़ी तेजी या बड़ी गिरावट की जगह 'स्थिरता' आने की उम्मीद है।

बजट 2026 सोने-चांदी के लिए एक 'डबल-एज स्वॉर्ड' (दोधारी तलवार) साबित हो सकता है। जहां सरकारी नीतियां इसे सस्ता बना सकती हैं, वहीं वैश्विक अनिश्चितता इसे सुरक्षित निवेश मानकर इसकी कीमतें बढ़ा सकती हैं। छोटे निवेशकों के लिए सलाह है कि वे बजट के 2 से 3 दिन बाद तक बाजार की दिशा स्पष्ट होने का इंतजार करें।

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