What is PM Dhara Scheme: पीएम नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली केंद्रीय कैबिनेट ने आज बुधवार, 30 सितंबर को एनर्जी सेक्टर के लिए एक नई योजना को हरी झंडी दिखाई है। दरअसल, कैबिनेट ने पीएम धारा योजना के नाम से एक नई स्कीम की घोषणा की है। इस योजना के तहत देश के अलग-अलग राज्यों में ग्रीन एनर्जी के ट्रांसमिशन सिस्टम को बेहतर बनाने का काम किया जाएगा।
ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-3 (GEC-3) नाम से शुरू होने वाली इस योजना के लिए 1.86 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसका लक्ष्य 5 साल में देश के सभी राज्यों में बैटरी सेविंग और ग्रीन एनर्जी का सिस्टम तैयार करना है।
केंद्रीय कैबिनेट की ओर से जारी फैसले में कहा गया है कि इस योजना के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 135 गीगावाट तक रिन्यूएबल एनर्जी को ग्रिड तक पहुंचाने की क्षमता विकसित की जाएगी। इसके साथ ही 50 गीगावाट बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम भी लगाया जाएगा।
योजना के तहत बैटरी स्टोरेज से जरूरत के समय बिजली उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी और सौर उर्जा की अनियमितता की समयस्या कम होगी। इस योजना को वित्त वर्ष 2032-33 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के तहत 51,126 किलोमीटर की ट्रांसमिशन लाइन बिछाने का भी प्रावधान है।
केंद्रीय कैबिनेट की तरफ से प्रस्तावित ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-3 योजना पर कुल मिलाकर करीब 1.86 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें से 1,36,378 करोड़ राज्यों के अंदर ट्रांसमिशन सिस्टम लगाने पर खर्च होंगे। इसके साथ ही 50,000 करोड़ रुपये 50 गीगावाट बैटरी स्टोरेज सिस्टम विकसित करने के लिए खर्च किए जाएंगे।
इस योजना के लिए केंद्र सरकार की तरफ से कुल 54,082 करोड़ की वित्तीय मदद दी जाएगी। इस सहायता से ट्रांसमिशन का खर्च कम रखने में मदद मिलेगी, जिसका फायदा आखिरकार बिजली उपभोक्ताओं को मिलेगा।
बता दें कि बैटरी स्टोरेज से पीक टाइम में बिजली की जरूरत, ग्रीड पर लोड और बिजली की कटौती जैसी परेशानियों से निपटने में मदद मिलेगी। इस योजना का मकसद सूर्य नहीं निकलने पर भी सोलर एनर्जी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने और इसमें मदद करना है। यह नई स्कीम 2035 तक 900 गीगावाट गैर-जीवाश्म उर्जा क्षमता के लक्ष्य हासिल करने में मदद करेगी।
सरकार के अनुसार, इससे देश की लंबी अवधि की उर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। वहीं, कार्बन उत्सर्जन कम करने और स्वच्छ उर्जा को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी।
बैटरी स्टोरेज से पीक ऑवर में बिजली कटौती से छुटकारा मिलेगी। केंद्र से फंड मिलने पर राज्यों के बीच बिजली आपूर्ति पर आने वाला खर्च कम होगा। इससे उपभोक्ताओं को फायदा मिलेगा। नई स्कीम के तहत सभी ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स को टैरिफ-बेस्ड कॉम्पिटिटिव बिडिंग (TBCB) मोड से लागू किया जाएगा, जबकि ब्राउनफील्ड अपग्रेडेशन और नेटवर्क को मजबूत करने के काम ‘कॉस्ट प्लस बेसिस’ (CPB) के तहत किए जाएंगे।
राज्य ट्रांसमिशन यूटिलिटीज (STUs) इसकी मुख्य एजेंसी होंगी और ट्रांसमिशन सर्विस प्रोवाइडर्स (TSPs) TBCB के तहत ‘बिल्ड-ऑन-ऑपरेट-मेंटेन’ (BOOM) मॉडल पर काम करेंगे।
पीएम धारा योजना लंबे समय तक देश की एनर्जी सुरक्षा में मददगार होगा। इससे बिजली सेक्टर, मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री में बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होंगे। बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के मैन्युफैक्चरिंग और इस्तेमाल से घरेलू एनर्जी स्टोरेज इंडस्ट्री में भी रोजगार के अवसर बनेंगे।
इसके साथ ही यह योजना राज्यों में ऑपरेशन, मेंटेनेंस और ग्रिड मैनेजमेंट के क्षेत्रों में लंबे समय के लिए कुशल रोजगार भी पैदा करेगी। फिलहाल सरकार ने इस योजना को मंजूरी दे दी है। अब देखना यह होगा कि इसे जमीनी स्तर पर कब से लागू किया जाता है।