ईटीएफ, (सोर्स- सोशल मीडिया)  
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शेयर मार्केट की ABC: कम रिस्क, ज्यादा मुनाफा, क्या होता है ETF? कैसे बना सकता है स्मार्ट इन्वेस्टर

Share Market: क्या आप शेयर बाजार में निवेश करना चाहते हैं लेकिन यह तय नहीं कर पा रहे कि कौन सा शेयर खरीदें? अगर हां, तो ETF आपके लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

मनोज आर्या

What is ETF: आज के समय में शेयर बाजार में निवेश के कई विकल्प मौजूद हैं। इन्हीं में से एक अहम विकल्प है ईटीएफ, जिसे एक्सचेंज ट्रेडेड फंड कहा जाता है। ईटीएफ एक ऐसा निवेश विकल्प है जो शेयर बाजार में स्टॉक की तरह खरीदा और बेचा जाता है, लेकिन इसमें निवेश म्यूचुअल फंड की तरह कई शेयरों, वस्तुओं या परिसंपत्तियों में एक साथ होता है।

ईटीएफ किसी एक इंडेक्स, वस्तु या प्रोपर्टी के मूल्य को दर्शाता है। उदाहरण के लिए, निफ्टी ईटीएफ, निफ्टी इंडेक्स के शेयरों में निवेश करता है। इसी तरह गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ सोने और चांदी की कीमत पर आधारित होता है। निवेशक अपने डीमैट अकाउंट के जरिए शेयर बाजार में ट्रेडिंग के समय ईटीएफ खरीद और बेच सकते हैं।

ETF में निवेश के लिए डीमैट अकाउंट जरूरी

ईटीएफ में निवेश करने के लिए निवेशक के पास डीमैट अकाउंट और ट्रेडिंग अकाउंट होना जरूरी होता है। शेयर बाजार खुला होने पर ईटीएफ को उसी तरह खरीदा जा सकता है, जैसे किसी कंपनी का शेयर खरीदा जाता है। इसकी कीमत दिन भर बदलती रहती है, जो संबंधित सूचकांक या वस्तु के मूल्य पर निर्भर करती है।

इक्विटी के मुकाबले ईटीएफ में कम रिस्क

बाजार के जानकारों के मुताबिक, इक्विटी यानी शेयर में निवेश करने पर पैसा किसी एक कंपनी में लगता है, जबकि ईटीएफ में एक साथ कई कंपनियों या परिसंपत्तियों में निवेश हो जाता है। इक्विटी में जोखिम ज्यादा होता है क्योंकि कंपनी के खराब प्रदर्शन से नुकसान हो सकता है, वहीं ईटीएफ में जोखिम तुलनात्मक रूप से कम होता है क्योंकि निवेश बंटा हुआ होता है।

ईटीएफ को कभी भी खरीदा या बेचा जा सकता है

वहीं अगर म्यूचुअल फंड को लेकर इसकी तुलना करें तो म्यूचुअल फंड में निवेश दिन के अंत की नेट एसेट वैल्यू पर होता है, जबकि ईटीएफ को दिन में कभी भी खरीदा या बेचा जा सकता है। म्यूचुअल फंड का प्रबंधन सक्रिय रूप से किया जाता है, जबकि अधिकतर ईटीएफ निष्क्रिय होते हैं और इंडेक्स को फॉलो करते हैं। इसके अलावा ईटीएफ में खर्च अनुपात भी कम होता है।

ईटीएफ का सबसे बड़ा फायदा

एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईटीएफ का सबसे बड़ा फायदा इसकी पारदर्शिता और कम लागत है। निवेशक को पता होता है कि उसका पैसा कहां लगाया गया है। कम खर्च अनुपात के चलते लंबे समय में बेहतर रिटर्न की संभावना रहती है। इसके अलावा ईटीएफ में तरलता अधिक होती है और इन्हें कभी भी खरीदा या बेचा जा सकता है

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