शेयर मार्केट, (प्रतीकात्मक तस्वीर) 
बिज़नेस

शेयर मार्केट की ABC: एक्स्ट्रा कमाई के 3 मंत्र, क्या होता है डिविडेंड, बोनस और स्टॉक स्प्लिट? जानें

Share Market: शेयर बाजार में ऐसे कई टर्म्स होते हैं, जिनकी सही समझ निवेशकों के लिए बेहद जरूरी है, क्योंकि ये सीधे तौर पर निवेश के जोखिम, रिटर्न और पोर्टफोलियो की वैल्यू को प्रभावित करते हैं।

मनोज आर्या

Share Market Terms: शेयर बाजार में कुछ ऐसे शब्द हैं जिनके बारे में निवेशकों के लिए जानना बड़ा ही जरूरी होता है, क्योंकि उनका सीधा असर उनकी कमाई और निवेश की वैल्यू पर पड़ सकता है। इनमें डिविडेंड, बोनस इश्यू और स्टॉक स्प्लिट सबसे अहम माने जाते हैं। इन तीनों को सही तरीके से समझना हर निवेशक के लिए जरूरी है। डिविडेंड वह हिस्सा होता है जो कंपनी अपने मुनाफे में से अपने शेयरधारकों को देती है।

जब कोई कंपनी अच्छा मुनाफा कमाती है और भविष्य के लिए पैसा बचाने के बाद कुछ रकम शेयरधारकों में बांटती है, तो उसे 'डिविडेंड' कहा जाता है। उदाहरण के लिए, अगर किसी कंपनी ने 10 रुपए प्रति शेयर डिविडेंड घोषित किया है और आपके पास उस कंपनी के 100 शेयर हैं, तो आपको कुल 1,000 रुपए का फायदा होगा जो डिविडेंड के रूप में आपको मिलेंगे।

क्या होता है बोनस शेयर?

वहीं, जब कोई कंपनी अपने मौजूदा शेयरधारकों को बिना किसी अतिरिक्त पैसे के नए शेयर देती है, तो उसे 'बोनस इश्यू या बोनस शेयर' कहा जाता है। यह भी कंपनी के मुनाफे से ही दिया जाता है, लेकिन इसमें नकद की जगह शेयर मिलते हैं। मान लीजिए किसी कंपनी ने 1:1 के अनुपात में बोनस इश्यू की घोषणा की। तो इसका मतलब है कि अगर आपके पास उस कंपनी के 50 शेयर हैं, तो आपको 50 अतिरिक्त शेयर मुफ्त में मिल जाएंगे।

स्टॉक स्प्लिट को ऐसे समझें

वहीं, जब कंपनी अपने एक शेयर को कई छोटे हिस्सों में बांटती है, तो उसे 'स्टॉक स्प्लिट' कहा जाता है। इसके पीछे की वजह यह है कि उस कंपनी के शेयर की कीमत कम हो जाए और ज्यादा लोग उसे खरीद सकें। इसमें शेयरों की संख्या बढ़ जाती है, लेकिन निवेश की कुल वैल्यू वही रहती है। जैसे, अगर किसी कंपनी का एक शेयर 1,000 रुपए का है और कंपनी 1:2 का स्टॉक स्प्लिट करती है, तो आपका एक शेयर दो शेयरों में बदल जाएगा और हर शेयर की कीमत करीब 500 रुपए हो जाएगी।

डिविडेंड से क्या फायदा?

इस तरह, डिविडेंड में निवेशकों को नकद पैसा मिलता है। बोनस इश्यू में बिना पैसे दिए अतिरिक्त शेयर मिलते हैं, जबकि स्टॉक स्प्लिट में शेयरों की संख्या बढ़ती है, लेकिन कोई अतिरिक्त फायदा तुरंत नहीं मिलता, सिर्फ शेयर की कीमत कम हो जाती है। जानकारों के मुताबिक, डिविडेंड से निवेशक को नियमित आय मिलती है। बोनस इश्यू से लंबे समय में निवेश बढ़ता है और शेयरों की संख्या ज्यादा हो जाती है। तो वहीं स्टॉक स्प्लिट से शेयर ज्यादा लोगों की पहुंच में आता है और बाजार में उसकी तरलता बढ़ती है।

अरुणाचल प्रदेश में डोली धरती, कुरुंग कुमे में महसूस किए गए भूकंप के झटके; दहशत में घरों से बाहर निकले लोग!

रक्षाबंधन पर PM मोदी का खास अंदाज, बच्चों के साथ की मस्ती; छोटी बच्ची से की ये खास फरमाइश- VIDEO

मेरे भाग्य में आंदोलनों से निपटना है, अमित शाह ने क्यों कही ये बात? कोरोना काल का भी सुनाया बड़ा अनुभव

धर्मांतरण कानून, नेपाल बाढ़ और राहुल गांधी पर रामदास आठवले का बड़ा बयान, जानिए आरक्षण पर क्या बोले मंत्री

सोनिया गांधी की आत्मकथा को लेकर बड़ा विवाद, पेंगुइन इंडिया ने प्रकाशन से किया इनकार