Sovereign Gold Bond में निवेश करने वाले निवेशकों को 2 नवंबर को मिलेगा पैसा
गोल्ड बॉन्ड खरीदने के पांच साल पूरे होने के बाद निवेशक भूना सकते हैं बॉन्ड
गोल्ड बॉन्ड की कीमत पिछले तीन कारोबारी दिनों में सोने के भाव का औसत निकाल लगाया जाता है
Money To Be Received On November 2 RBI Sets Price At 14,167 Per Unit: सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में पैसा लगाने वाले निवेशकों के लिए अच्छी खबर है। भारतीय रिजर्व बैंक ने SGB 2021-22 सीरीज VII के निवेशकों को पैसा वापस देने की कीमत तय कर दी है। इस सीरीज के निवेशकों को 2 नवंबर 2026 को हर एक यूनिट के बदले 14,167 रुपये मिलेंगे। यानी जिन लोगों ने इस सीरीज में निवेश किया था, वे तय नियमों के अनुसार अपना पैसा वापस ले सकते हैं।
दरअसल, भारत सरकार ने 21 अक्टूबर 2021 को जारी अधिसूचना में बताया था कि गोल्ड बॉन्ड खरीदने के पांच साल पूरे होने के बाद निवेशक इसे समय से पहले भी भुना सकते हैं। इसके लिए ब्याज मिलने की तारीख तय होती है। SGB 2021-22 सीरीज VII को 2 नवंबर 2021 को जारी किया गया था। इस हिसाब से 2 नवंबर 2026 को इसके पांच साल पूरे हो रहे हैं। इसलिए निवेशकों को इस दिन पैसा वापस लेने का मौका मिलेगा।
RBI के आंकड़ों के अनुसार, SGB 2021-22 सीरीज VII जारी करते समय ऑनलाइन निवेश करने वालों को एक ग्राम सोने के लिए 4,715 रुपये देने पड़े थे। वहीं, ऑफलाइन माध्यम से बॉन्ड खरीदने वालों के लिए इसकी कीमत 4,765 रुपये प्रति ग्राम रखी गई थी।
पांच साल बाद अब इस बॉन्ड की कीमत बढ़कर 14,167 रुपये प्रति यूनिट हो गई है। ऐसे में ऑनलाइन निवेश करने वालों को हर ग्राम पर 9,452 रुपये का सीधा फायदा होगा। यानी शुरुआती निवेश के मुकाबले करीब 200.47 फीसदी का रिटर्न मिलेगा।
RBI के मुताबिक, गोल्ड बॉन्ड की कीमत तय करने के लिए पिछले तीन कारोबारी दिनों में सोने के भाव का औसत निकाला जाता है। इसके लिए 999 शुद्धता वाले सोने की कीमत देखी जाती है। ये भाव इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) की ओर से जारी किए जाते हैं।
इस बार 28, 29 और 30 अक्टूबर 2026 के सोने के भाव का औसत निकाला गया। इसके आधार पर एक यूनिट की कीमत 14,167 रुपये तय हुई है। बता दें कि गोल्ड बॉन्ड की एक यूनिट एक ग्राम सोने के बराबर होती है। यानी अगर किसी निवेशक के पास 10 यूनिट हैं तो उसे कुल 1,41,670 रुपये मिलेंगे।
केंद्र की मोदी सरकार ने साल 2015 में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना शुरू की थी। इसका मकसद लोगों को सोने में निवेश का एक आसान विकल्प देना और सोने की खरीद के लिए विदेशों पर भारत की निर्भरता कम करना था।
इस योजना में निवेशक को असली सोना खरीदने की जरूरत नहीं होती। वह सोने के बराबर कीमत का बॉन्ड खरीदता है। इसकी कीमत सोने के बाजार भाव के हिसाब से घटती-बढ़ती है। खास बात यह है कि निवेशक को सोने की कीमत बढ़ने का फायदा मिलने के साथ हर साल 2.5 प्रतिशत ब्याज भी मिलता है।
पिछले कुछ वर्षों में सोने की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है। इसका असर सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना पर भी पड़ा है। जब निवेशक अपना बॉन्ड वापस करते हैं तो सरकार को उस समय के सोने के भाव के हिसाब से पैसा देना पड़ता है।
यानी जिस समय सरकार ने बॉन्ड जारी किए थे, उस समय सोने की कीमत कम थी। लेकिन अब सोने का भाव काफी बढ़ चुका है। ऐसे में निवेशकों को पैसा लौटाने के लिए सरकार को पहले के मुकाबले ज्यादा रकम खर्च करनी पड़ रही है।
इस तरह यह योजना निवेशकों के लिए फायदेमंद साबित हुई है, लेकिन सोने की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से सरकार पर भी आर्थिक बोझ बढ़ा है।