सेंसेक्स 298.99 अंक चढ़कर 72,771.32 पर और निफ्टी 72.75 अंक बढ़कर 22,593.20 पर खुला।
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 97 पैसे मजबूत होकर 95.76 पर खुला, जबकि ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आया।
FII की बिकवाली, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की चाल आगे बाजार की दिशा तय करने वाले अहम कारक रहेंगे।
Stocke Market Today: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को कारोबारी सप्ताह की शुरुआत मामूली बढ़त के साथ हुई। एशियाई बाजारों से मिले-जुले संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के बीच सेंसेक्स और निफ्टी हरे निशान में खुले। वहीं, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी मजबूत हुआ।
शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 400 अंकों से ज्यादा चढ़ा, जबकि निफ्टी ने भी बढ़त दर्ज की। हालांकि, वैश्विक बाजारों की अनिश्चितता, ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों की बिकवाली को लेकर चिंता बनी हुई है। ऐसे में निवेशकों की नजर बाजार की आगे की चाल, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर रहेगी।
सोमवार को बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 72,472.33 के मुकाबले 298.99 अंक यानी 0.41 प्रतिशत की बढ़त के साथ 72,771.32 पर खुला। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 ने 72.75 अंक यानी 0.32 प्रतिशत चढ़कर 22,593.20 पर कारोबार की शुरुआत की। दिन के दौरान सेंसेक्स 72,884.25 और निफ्टी 22,651.10 के उच्चतम स्तर तक पहुंचे।
व्यापक बाजार में प्रमुख सूचकांकों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन देखने को मिला। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में करीब 1.3 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जबकि निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.40 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त रही। इससे संकेत मिला कि शुरुआती कारोबार में निवेशकों की दिलचस्पी छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयरों में भी बनी हुई थी।
सेक्टरवार कारोबार में निफ्टी ऑटो, मेटल्स, रियल्टी, ऑयल एंड गैस और फार्मा इंडेक्स में तेजी देखने को मिली। इसके उलट निफ्टी FMCG, IT और PSU बैंक इंडेक्स में बिकवाली का दबाव रहा। अलग-अलग सेक्टरों में इस तरह का प्रदर्शन शेयर बाजार में निवेशकों की सतर्कता और चुनिंदा शेयरों में खरीदारी की रणनीति को दर्शाता है।
भारतीय मुद्रा में भी मजबूती देखने को मिली। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 97 पैसे मजबूत होकर 95.76 पर खुला, जबकि इससे पहले यह 96.73 पर बंद हुआ था। रुपये की चाल पर अंतरराष्ट्रीय बाजार, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों का असर पड़ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 103 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई। ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताओं में कमी को तेल की कीमतों में नरमी की एक वजह बताया गया।
भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट राहत दे सकती है, क्योंकि इससे आयात बिल और महंगाई पर दबाव कम होने की संभावना रहती है।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की बिकवाली निकट अवधि में बाजार पर दबाव बनाए रख सकती है।
वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII की खरीदारी इस दबाव को कुछ हद तक संतुलित कर सकती है। ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और वैश्विक अनिश्चितता भी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर सकती है।
भारत की आर्थिक वृद्धि और कंपनियों के मुनाफे में सुधार की उम्मीद बाजार के लिए सकारात्मक कारक माने जा रहे हैं। दिए गए आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 के लिए 7.1 प्रतिशत GDP ग्रोथ का अनुमान भी निवेशकों के भरोसे को समर्थन दे सकता है। हालांकि, बाजार की वास्तविक दिशा आने वाले आर्थिक आंकड़ों और कंपनियों के वित्तीय नतीजों पर निर्भर करेगी।
तकनीकी विश्लेषकों के मुताबिक, निफ्टी के लिए 22,295 का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है। वहीं, 22,800 से 23,200 के दायरे को संभावित तेजी के स्तर के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, ये बाजार विशेषज्ञों के अनुमान हैं, निश्चित लक्ष्य नहीं। निवेशकों को कारोबार के दौरान बाजार की चाल और जोखिम को ध्यान में रखना चाहिए।