सेंसेक्स 15.98 अंक चढ़कर 73,049.76 पर खुला, जबकि निफ्टी 6.20 अंक फिसलकर 22,715.75 पर खुला।
निफ्टी आईटी में 1 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी रही, जबकि कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और हेल्थकेयर शेयरों पर दबाव दिखा।
कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, रुपये की चाल और WPI महंगाई के आंकड़े बाजार की दिशा के लिए अहम रहेंगे।
Share Market Today: भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार, 14 अक्टूबर को सपाट शुरुआत की। पिछले कारोबारी सत्र में डेढ़ प्रतिशत से ज्यादा की तेजी के बाद निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। शुरुआती कारोबार में आईटी शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जबकि निफ्टी में मामूली गिरावट दर्ज की गई।
वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेत, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बाजार की चाल को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक बने हुए हैं। निवेशकों की नजर घरेलू महंगाई के आंकड़ों और कंपनियों के दूसरी तिमाही के नतीजों पर भी टिकी है।
बुधवार को बीएसई सेंसेक्स 73,049.76 के स्तर पर खुला। पिछले कारोबारी सत्र में यह 73,033.78 पर बंद हुआ था। इस तरह सेंसेक्स में 15.98 अंक यानी 0.02 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
वहीं, एनएसई निफ्टी 50 पिछले बंद स्तर 22,721.95 के मुकाबले 22,715.75 पर खुला। इसमें 6.20 अंक यानी 0.03 प्रतिशत की मामूली गिरावट रही। पिछले सत्र की तेज बढ़त के बाद बाजार की शुरुआत से संकेत मिला कि निवेशक आगे की दिशा तय करने से पहले घरेलू और वैश्विक संकेतों का आकलन कर रहे हैं।
सेक्टरवार कारोबार में निफ्टी आईटी सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले सूचकांकों में शामिल रहा और इसमें 1 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई। निफ्टी मिडस्मॉल आईटी एंड टेलीकॉम और निफ्टी एफएमसीजी में भी 0.38 प्रतिशत तक की बढ़त देखी गई।
निफ्टी मीडिया और निफ्टी प्राइवेट बैंक के सूचकांक भी हरे निशान में कारोबार करते नजर आए। इसके विपरीत, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 0.67 प्रतिशत की गिरावट आई। हेल्थकेयर से जुड़े सूचकांकों पर भी दबाव रहा, जबकि निफ्टी पीएसयू बैंक में कमजोरी देखने को मिली।
शुरुआती कारोबार में निफ्टी 50 के नुकसान उठाने वाले शेयरों में श्रीराम फाइनेंस, बजाज फाइनेंस और बीएसई शामिल रहे। व्यापक बाजारों में भी कमजोरी दिखाई दी।
निफ्टी स्मॉल कैप 100 में 0.15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी मिड कैप सूचकांक 0.33 प्रतिशत नीचे रहा। इससे संकेत मिलता है कि शुरुआती कारोबार में तेजी का रुख सभी शेयरों और बाजार श्रेणियों में एक जैसा नहीं था।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, मंगलवार को निफ्टी में डेढ़ प्रतिशत से ज्यादा की तेजी कमजोर बाजार में अप्रत्याशित रही। इस तेजी के पीछे शॉर्ट कवरिंग को एक प्रमुख वजह माना गया।
इसके अलावा, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) पर हितधारकों की राय की समीक्षा करने संबंधी टिप्पणी से भी निवेशकों की धारणा को समर्थन मिला। बाजार में संभावित नीतिगत बदलावों की उम्मीद के बीच निवेशकों ने खरीदारी की, हालांकि इन टिप्पणियों को किसी घोषित टैक्स बदलाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
विश्लेषकों के अनुसार, मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी को नियंत्रित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के हालिया कदमों के बाद रुपये में मजबूती आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो कारोबारी सत्रों में रुपया करीब 1.5 प्रतिशत मजबूत हुआ।
हालांकि, अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड लगभग 5.2 प्रतिशत और ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 106 डॉलर प्रति बैरल बने रहना भारतीय शेयर बाजार के लिए चुनौती माना जा रहा है। ऊंची तेल कीमतें आयात लागत और महंगाई पर दबाव डाल सकती हैं, जबकि बॉन्ड यील्ड में मजबूती निवेशकों के जोखिम लेने के रुख को प्रभावित कर सकती है।
तकनीकी विश्लेषकों के मुताबिक, हालिया तेजी के बाद निफ्टी के 23,200 के स्तर तक पहुंचने की उम्मीद फिर मजबूत हुई है। हालांकि, सूचकांक के सामने कुछ अहम प्रतिरोध स्तर भी हैं। विश्लेषकों ने 22,550 के आसपास तत्काल सपोर्ट बताया है।
वहीं, 22,787 से 22,880 के दायरे के ऊपर निर्णायक बढ़त आने पर तेजी के रुख को और मजबूती मिल सकती है। ये तकनीकी स्तर बाजार की संभावित दिशा का संकेत देते हैं, लेकिन वास्तविक चाल वैश्विक घटनाक्रम और निवेशकों की खरीद-बिक्री पर निर्भर करेगी।
लगातार दो कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद एशियाई बाजारों में सुधार के संकेत दिखाई दिए। निवेशकों को उम्मीद है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व भविष्य में ब्याज दरों को लेकर कम आक्रामक रुख अपना सकता है।
दूसरी ओर, पश्चिम एशिया से जुड़े घटनाक्रम और वैश्विक स्तर पर डीजल आपूर्ति की संभावनाओं पर भी बाजार की नजर है। घरेलू मोर्चे पर निवेशक अगस्त के थोक मूल्य सूचकांक (WPI) मुद्रास्फीति आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं। इसके साथ ही कंपनियों के दूसरी तिमाही के नतीजे भी वित्तीय, दूरसंचार, धातु और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।