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Stock Market Outlook: इजरायल-ईरान युद्ध का दवाब, सोमवार को कैसी रहेगी मार्केट की चाल; जानें एक्सपर्ट की राय

Share Market: आने वाले सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक घटनाक्रमों, विशेषकर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों की अस्थिरता से तय होने वाली है।

मनोज आर्या

Share Market Outlook: इस सप्ताह शेयर बाजारों की दिशा मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से जुड़े घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर इसके प्रभाव से तय होगी। विश्लेषकों का कहना है कि इसके अलावा, वैश्विक बाजार के रुझान और विदेशी निवेशकों के रुख से भी निवेशकों की धारणा प्रभावित होगी।

रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के शोध उपाध्यक्ष अजीत मिश्रा ने कहा कि इस सप्ताह वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की दिशा को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण बाहरी कारक बने रहेंगे।

खुदरा महंगाई के आंकड़ों पर नजर

इसके साथ ही, कुछ प्रमुख व्यापक आर्थिक आंकड़े भी जारी होंगे, जो निकट भविष्य की धारणा को आकार दे सकते हैं। घरेलू मोर्चे पर निवेशक 12 मार्च को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर बारीकी से नजर रखेंगे। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 8.52 प्रतिशत उछलकर 92.69 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है।

कच्चे तेल के कीमतों का भी असर

ऑनलाइन कारोबार और संपत्ति फर्म एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि आने वाला सप्ताह अस्थिर रहने की संभावना है, क्योंकि बाजार की धारणा काफी हद तक पश्चिम एशिया में लगातार जारी भू-राजनीतिक तनाव से प्रभावित होगी। उन्होंने कहा कि निवेशक वैश्विक घटनाक्रमों, विशेष रूप से कच्चे तेल की कीमतों पर नजर रखेंगे क्योंकि ऊर्जा बाजार जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पिछले सप्ताह बीएसई सेंसेक्स 2,368.29 अंक या 2.91 प्रतिशत टूट गया, जबकि निफ्टी में 728.2 अंक या 2.89 प्रतिशत की गिरावट आई।

रुपये की गिरावट से FII की बिकवाली

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर अनिश्चितता, बाजार में लगातार गिरावट, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के प्रति भारतीय अर्थव्यवस्था की संवेदनशीलता और रुपये की तेज गिरावट ने एफआईआई की बिकवाली को बढ़ाया।

विजयकुमार ने कहा कि जब तक संघर्ष के परिणाम पर कुछ स्पष्टता नहीं आती और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट नहीं होती, तब तक एफपीआई के खरीदार के रूप में बाजार में लौटने की संभावना कम है। उन्होंने कहा कि ब्रेंट क्रूड का 90 डॉलर से ऊपर होना भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजारों के लिए बुरी खबर है।

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