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निफ्टी के रिकॉर्ड हाई के बीच विदेशी ब्रोकरेज की चेतावनी, क्या 2026 में थम जाएगी बाजार की रफ्तार?

Nifty Lifetime High: निफ्टी के 26,300 के पार नया रिकॉर्ड बनाने के बावजूद विदेशी ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने भारतीय बाजार की रेटिंग घटाकर ‘न्यूट्रल’ कर दी है और 2026 में सीमित रिटर्न की संभावना जताई है।

प्रतीक पाण्डेय

Bernstein Rating Downgrade: भारतीय शेयर बाजार ने हाल ही में 26,300 के स्तर को पार कर नया लाइफटाइम हाई बनाया है, जिससे निवेशकों में उत्साह है। हालांकि, वैश्विक ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने ऊंचे वैल्यूएशन और भविष्य में महज 7.5% रिटर्न का अनुमान जताते हुए बाजार पर अपना रुख 'न्यूट्रल' कर दिया है।

बीते शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार ने एक बार फिर अपनी मजबूती साबित की। उतार-चढ़ाव भरे सत्र के बाद निफ्टी करीब 182 अंक या 0.70% की बढ़त के साथ 26,300 के ऊपर बंद हुआ, जो इसका अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे ट्रेंडिंग सेशन में सेक्टर और स्टॉक-आधारित मूवमेंट निवेशकों के लिए अधिक अवसर पैदा करते हैं। विशेष रूप से फार्मा और मिडकैप पावर स्टॉक्स में मजबूत टेक्निकल ब्रेकआउट देखा जा रहा है, जिसमें और अधिक तेजी की संभावना है। उदाहरण के लिए, अरबिंदो फार्मा जैसे शेयरों पर चार्ट एक्सपर्ट्स बुलिश नजर आ रहे हैं।

सोमवार की शुरुआत में सुस्ती और रुपये में गिरावट

हालांकि, नए हफ्ते के पहले कारोबारी दिन यानी सोमवार को बाजार की शुरुआत लाल निशान के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में निफ्टी 50 मामूली गिरावट के साथ 26,313.40 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। लेकिए एस बार फिर इसने रफ्तार पकड़ी और नया ऑकड़ा छुआ। इस सुस्ती के साथ-साथ मुद्रा बाजार में भी दबाव देखा गया, जहां अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 4 पैसे गिरकर 90.24 के स्तर पर आ गया। इस गिरावट का मुख्य कारण वेनेजुएला में अमेरिकी हस्तक्षेप से उत्पन्न भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं मानी जा रही हैं, जिसने सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर की मांग को बढ़ा दिया है।

विदेशी ब्रोकरेज की चेतावनी: 'महंगा' हुआ भारतीय बाजार

बाजार की इस चमक के बीच ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन (Bernstein) ने भारतीय शेयर बाजार को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। ब्रोकरेज ने भारत की रेटिंग को 'पॉजिटिव' से घटाकर 'न्यूट्रल' कर दिया है।, बर्नस्टीन के विश्लेषण के अनुसार, भारतीय बाजार इस समय दुनिया के सबसे महंगे बाजारों में से एक है। वर्तमान में भारत का फॉरवर्ड प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) मल्टीपल 20 गुना से अधिक है, जबकि दुनिया के 15 प्रमुख बाजारों का औसत महज 15.1 गुना है। ऐतिहासिक रुझानों को देखें तो निवेशक अक्सर ऐसे समय में महंगे बाजारों के बजाय सस्ते बाजारों में निवेश करना पसंद करते हैं।

2026 का लक्ष्य: सीमित रिटर्न की उम्मीद

बर्नस्टीन की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में निफ्टी के लिए 28,100 का लक्ष्य तय किया गया है। मौजूदा स्तरों से यह केवल 7.5% की वृद्धि को दर्शाता है, जिसे रिस्क के मुकाबले काफी सीमित माना जा रहा है। अर्निंग ग्रोथ के मोर्चे पर भी तस्वीर बहुत मजबूत नहीं है, क्योंकि 2025 में विकास की गति तुलनात्मक रूप से कमजोर रही है। ऐसे माहौल में निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे अंधाधुंध निवेश के बजाय 'स्टॉक सिलेक्शन' और वैल्यूएशन के अनुशासन पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि अब अर्निंग ग्रोथ से ज्यादा रिटर्न वैल्यूएशन री-रेटिंग पर निर्भर करेगा।

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