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Share Market: गिरावट के साथ बंद हुआ बाजार, सेंसेक्स 122 अंक फिसला; इन सेक्टर्स पर सबसे ज्यादा दबाव

Share Market: एक्सपर्ट्स का कहना है कि निकट भविष्य के लिए बाजार का रुख अनिश्चित बना हुआ है, क्योंकि निफ्टी 24,300 के रेजिस्टेंस स्तर को निर्णायक रूप से पार करने में विफल रहा।

मनोज आर्या

Share Market Highlights: पश्चिम एशिया तनाव के बीच कमजोर वैश्विक संकेतों के चलते गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुए। इस दौरान घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्कों में मामूली गिरावट देखने को मिली। बाजार बंद होने के समय सेंसेक्स 122.56 अंक यानी 0.16 प्रतिशत गिरकर 77,988.68 पर था, जबकि निफ्टी 34.55 अंक या 0.14 प्रतिशत गिरकर 24,196.75 पर कारोबार करते नजर आया। व्यापक बाजारों ने बेंचमार्क सूचकांकों से बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप में 0.63 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.89 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

वहीं, सेक्टरवार देखें तो सबसे ज्यादा निफ्टी मेटल में 1.53 प्रतिशत की तेजी और निफ्टी आईटी में 0.88 प्रतिशत की तेजी देखी गई। इसके अलावा, निफ्टी मीडिया, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी एफएमसीजी ने भी बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी ऑटो और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में गिरावट देखने को मिली।

HDFC बैंक को सबसे ज्यादा नुकसान

निफ्टी 50 में सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों में एचडीएफसी बैंक, ओएनजीसी, एचडीएफसी लाइफ, टाइटन, एमएंडएम, भारती एयरटेल और अपोलो हॉस्पिटल्स शामिल रहे, जबकि अदाणी एंटरप्राइजेज, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, इटरनल, अदानी पोर्ट्स और बीईएल के शेयरों में सबसे ज्याद तेजी देखने को मिली। अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम को लेकर दूसरे दौर की वार्ता पर संशय बने रहने के कारण निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।

आगे कैसा रहेगा बाजार का रूख?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि निकट भविष्य के लिए बाजार का रुख अनिश्चित बना हुआ है, क्योंकि निफ्टी 24,300 के रेजिस्टेंस स्तर को निर्णायक रूप से पार करने में विफल रहा। हालांकि, अगर अगले सत्र में यह 24,300 से ऊपर मजबूती से बढ़ता है, तो निकट भविष्य में एक स्थायी तेजी देखने को मिल सकती है। अन्यथा, मुनाफावसूली का एक बड़ा दौर शुरू हो सकता है, जो संभावित रूप से इंडेक्स को 24,000 की ओर खींच सकता है।

डॉलर में मामूली मजबूती और वैश्विक जोखिम भावना में सुधार के चलते भारतीय रुपया गुरुवार को डॉलर के मुकाबले 61 पैसे बढ़कर 93.98 पर बंद हुआ, जबकि पिछले दिन यह 93.37 पर बंद हुआ था।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह मजबूती मुख्य रूप से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीदों से प्रेरित है, जिसके चलते पिछले 48 घंटों में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है, जिससे भारत के आयात बिल पर दबाव कम हुआ है। इसके अतिरिक्त, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की खरीदारी और भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों से मिल रहे सकारात्मक संकेतों से भी बाजार की भावना को बल मिल रहा है, क्योंकि कैश फ्लो में सुधार से करेंसी मजबूत होती है।

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